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सुखोई और तेजस के पंखों पर सवार होगी 'रुद्रम', जानें ऊंचाई-सिग्नल और रेडिएशन से जुड़ी खूबियां

Fri, 09 Oct 2020 05:48 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम' - फोटो : ANI
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। डीआरडीओ ने शुक्रवार को पूर्वी तट से सुखोई-30 लड़ाकू विमान से एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम' का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है।

                                           
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सूखोई-30 में एकीकृत एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम' - फोटो : ANI

देश की पहली स्वदेशी एंटी रेडिएशन मिसाइल

डीआरडीओ ने कहा, 'रुद्रम भारतीय वायुसेना के लिए बनाई गई देश की पहली स्वदेशी एंटी रेडिएशन मिसाइल है जिसे डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है। इस मिसाइल को लॉन्च प्लेटफॉर्म के रूप में सुखोई एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में एकीकृत किया गया है, इसमें लॉन्च स्थितियों के आधार पर अलग-अलग रेंज की क्षमता है।'

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सूखोई-30 से निकलकर हवा में गोते लगाता रुद्रम-1 - फोटो : ANI

अंतिम हमले के लिए पैसिव होमिंग हेड के साथ आईएनएस-जीपीएस नेविगेशन

डीआरडीओ ने आगे कहा, 'इसमें अंतिम हमले के लिए पैसिव होमिंग हेड के साथ आईएनएस-जीपीएस नेविगेशन है। 'रुद्रम' ने रेडिएशन लक्ष्य को पिनपॉइंट सटीकता से मारा। पैसिव होमिंग हेड एक विस्तृत बैंड पर लक्ष्य का पता लगाने, वर्गीकृत करने और लक्ष्य को इंगेज करने (उलझाने) में सक्षम है।'

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रुद्रम-1 - फोटो : ANI

किसी भी ऊंचाई से दागा जा सकता है यह मिसाइल

भारत में बनाई गई ये अपने आप की पहली मिसाइल है जिसे किसी भी ऊंचाई से दागा जा सकता है। मिसाइल किसी भी तरह के सिग्नल और रेडिएशन को पकड़ने में सक्षम है। साथ ही अपनी रडार में लाकर ये मिसाइल नष्ट कर सकती है। फिलहाल मिसाइल डेवलेपमेंट ट्रायल में जारी है।

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रुद्रम-1 - फोटो : ANI

स्वदेशी विमान तेजस में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा

ट्रायल पूरा होने के बाद जल्द ही इन्हें सुखोई और स्वदेशी विमान तेजस में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। बता दें कि सोमवार को डीआरडीओ ने सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (स्मार्ट) का सफल परीक्षण किया था। डीआरडीओ ने इसका ओडिशा के तटीय इलाके में परीक्षण किया था।

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