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ICMR: टीके की बदौलत कब्जे में आया रूबेला, सरकार के टीकाकरण नीति पर सामने आई आईसीएमआर की निगरानी रिपोर्ट

Fri, 25 Jul 2025 04:48 AM IST
शिव शुक्ला परीक्षित निर्भय

सार

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की एक निगरानी रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में एमआर टीकाकरण कवरेज 2023 तक कई राज्यों में 95% से ऊपर दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 से जारी मिशन इंद्रधनुष और मीजल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान के तहत देशभर में बच्चों को व्यापक रूप से रूबेला रोधी टीका दिया जा रहा है।
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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : freepik.com
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विस्तार
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देश में जन्मजात रूबेला संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण अब असरदार साबित हो रहा है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के जरिए बच्चों को मिलने वाले टीका की बदौलत अब संक्रमण पर आसानी से काबू पाया जा रहा है।

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यह खुलासा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की एक निगरानी रिपोर्ट में हुआ है जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपा गया है। इसमें यह भी बताया कि भारत में एमआर टीकाकरण कवरेज 2023 तक कई राज्यों में 95% से ऊपर दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 से जारी मिशन इंद्रधनुष और मीजल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान के तहत देशभर में बच्चों को व्यापक रूप से रूबेला रोधी टीका दिया जा रहा है। मीजल्स-रूबेला (एमआर) टीका की दो खुराक दी जा रही हैं जिसकी पहली खुराक 9 से 12 महीने की उम्र में और दूसरी 16 से 24 महीने में दी जा रही है। जैसे जैसे इस टीकाकरण कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप मिल रहा है, वैसे ही बीमारी का दायरा भी कम हुआ है। स्थिति यह है कि रूबेला संक्रमण से जुड़ी जटिलताओं के मामलों में पिछले पांच वर्षों में लगातार गिरावट आने के सबूत मिले हैं।

आईसीएमआर के चेन्नई स्थित राष्ट्रीय जानपदिक रोग विज्ञान संस्थान ने रिपोर्ट में जानकारी दी है कि साल 2017 में जहां बच्चों में जन्मजात रूबेला संक्रमण के संदिग्ध मामलों में से 25% में संक्रमण की पुष्टि हो रही थी जबकि साल 2022 तक यह आंकड़ा घटकर 2.5% रह गया।
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महिलाओं की प्रतिरक्षा दर भी 85 फीसदी के पार
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रजनन आयु (15-45 वर्ष) की लगभग 85% महिलाएं रूबेला संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षित हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज वी. मुर्हेकर ने बताया कि यह आंकड़े भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता को बयां कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि बाकी महिलाओं की प्रतिरक्षा भी सुनिश्चित करने के लिए पूर्व-गर्भावस्था जांच और जागरूकता को और बढ़ाया जाए, ताकि भविष्य में जन्मजात विकृति का जोखिम और कम हो सके।

जल्द रूबेला मुक्त बनेगा भारत- आईसीएमआर
डॉ. मनोज ने कहा कि देश के 14 अलग अलग अस्पतालों से एकत्रित आंकड़ों और उसके विश्लेषण पर आधारित यह रिपोर्ट हमें भारत की उन क्षमताओं की झलक दिखा रही है जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि भारत रूबेला उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। टीकाकरण, निगरानी और मातृ स्वास्थ्य जागरूकता के सम्मिलित प्रयासों से जन्मजात रूबेला संक्रमण के मामलों में गिरावट स्पष्ट रूप से दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में संक्रमण से बचाव ही आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा है लेकिन अब जरूरत बाकी 15% महिलाओं तक टीकाकरण पहुंचाना है। 

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