आंख में धूल, मिट्टी, पलक या कोई छोटा कण चला जाना आम समस्या है। ऐसे में आंख में जलन, किरकिराहट, दर्द, पानी आना, धुंधला दिखाई देना और तेज रोशनी से परेशानी हो सकती है। अक्सर लोग तुरंत आंख रगड़ने लगते हैं या उंगली, चिमटी जैसी चीजों से कण निकालने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा करना आंख के लिए नुकसानदायक हो सकता है। द गार्जियन में प्रकाशित विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, आंख में कुछ चले जाने पर उसे सुरक्षित तरीके से निकालना और सही समय पर डॉक्टर को दिखाना बेहद जरूरी है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. डगलस लाजारो के अनुसार पलक, रेत या मस्कारा जैसे छोटे कण कई बार लगातार पलक झपकाने और आंखों में बनने वाले प्राकृतिक आंसुओं से बाहर निकल जाते हैं। इसलिए सबसे पहले आंख को रगड़ने के बजाय कुछ बार धीरे-धीरे पलक झपकाएं।अगर कण बाहर न निकले तो हाथ अच्छी तरह धोएं और पर्याप्त रोशनी वाली जगह पर आंख को देखें। निचली पलक को साफ उंगलियों से धीरे से नीचे खींचकर कण की स्थिति देखी जा सकती है। अगर वस्तु छोटी है और आंख में धंसी नहीं है, तो कृत्रिम आंसू डालकर आंख को धोने की कोशिश की जा सकती है।अगर इसके बाद भी कण न निकले या आंख में लगातार परेशानी बनी रहे तो खुद निकालने के बजाय नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें।
आंख में केमिकल चला जाए तो तुरंत करें ये काम
अगर आंख में डिटर्जेंट, कीटाणुनाशक, ब्लीच, अमोनिया या ड्रेन क्लीनर जैसे रसायन चले जाएं तो स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। मेयो क्लिनिक के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कीथ बारात्ज के अनुसार ऐसी स्थिति में आंख को तुरंत साफ बहते पानी से धोना चाहिए।केमिकल आंख में जाने के बाद इलाज के लिए जाने से पहले आधे घंटे या उससे अधिक इंतजार नहीं करना चाहिए। पानी से आंख धोने के बाद भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि आंख को नुकसान पहुंचने की प्रक्रिया पानी से धोने के बाद भी जारी रह सकती है।
कब आंख के डॉक्टर को दिखाना जरूरी है
अगर कोई वस्तु आंख में धंसी हुई है, कॉर्निया में फंसी है या आंख से चिपकी हुई दिखाई दे रही है तो उसे खुद निकालने की कोशिश न करें। डॉक्टर विशेष उपकरणों की मदद से इसे सुरक्षित तरीके से निकाल सकते हैं।कण निकालने के बाद भी अगर आंख में दर्द, लालिमा, सूजन, लगातार पानी आना, जलन या धुंधला दिखाई देना जारी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर स्थिति में सुधार नहीं होने पर भी नेत्र चिकित्सक को दिखाना जरूरी है।
आंख रगड़ना और चिमटी से निकालना क्यों खतरनाक
आंख में कुछ चले जाने पर उसे जोर से रगड़ना सबसे आम गलतियों में से एक है। इससे मौजूद कण कॉर्निया में और गहराई तक जा सकता है और आंख की सतह पर खरोंच लग सकती है। हाथों के जरिए बैक्टीरिया आंख में पहुंचने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।चिमटी, सुई, टूथपिक या किसी नुकीली वस्तु से आंख से कण निकालने की कोशिश बिल्कुल न करें। इससे आंख में गंभीर चोट लग सकती है।
कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो रखें खास सावधानी
आंख में जलन या चोट होने पर कॉन्टैक्ट लेंस लगाए रखना या उन्हें तुरंत दोबारा पहन लेना भी समस्या बढ़ा सकता है। जब तक आंख पूरी तरह ठीक न हो जाए, कॉन्टैक्ट लेंस के बजाय चश्मे का इस्तेमाल करना बेहतर है।
आंखों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा चश्मा पहनें
घास काटने, निर्माण कार्य, लकड़ी या धातु पर काम करने जैसी गतिविधियों में सामान्य चश्मे के बजाय सुरक्षा चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए। छोटे कण सामान्य चश्मे के नीचे से भी आंख तक पहुंच सकते हैं।
मोटेतौर पर आंख में धूल या छोटा कण चला जाए तो सबसे पहले आंख रगड़ने से बचें। पलक झपकाने या कृत्रिम आंसुओं से छोटी वस्तु बाहर निकालने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन वस्तु आंख में धंसी हो, केमिकल चला गया हो या दर्द और नजर की समस्या बनी रहे तो घरेलू उपाय करने के बजाय तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें।