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RTI दिवस: कानून लागू हुए हो गया एक दशक, सिर्फ 0.3 फीसदी लोगों ने किया प्रयोग

Wed, 12 Oct 2016 04:38 AM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : demo
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vआरटीआई पर काम करने वाली संस्था कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) की एक रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है। 
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संस्था ने केंद्रीय और 14 राज्य सूचना आयोगों की वार्षिक रिपोर्ट के अध्ययन में पाया कि सिर्फ 0.3 प्रतिशत लोगों ने आरटीआई आवेदन लगाए। जबकि आरटीआई एक्ट 12 अक्टूबर 2005 को पूरे देश में लागू कर दिया गया था। सीएचआरआई के प्रोग्राम कॉर्डिनेटर वेंकटेश नायक ने बताया कि केंद्रीय सूचना आयोग और छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मेघालय, सिक्किम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम, नागालैंड, राजस्थान, उत्तराखंड, असम, पश्चिम बंगाल के राज्य सूचना आयोगों की वेबसाइट की 2014-15 की वार्षिक रिपोर्ट के आधार पता चलता है कि कुल 26 लाख आरटीआई फाइल की गई हैं।

बाकी के प्रदेशों की वार्षिक रिपोर्ट उनकी वेबसाइट पर नहीं थी। जबकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के आदेश के मुताबिक सभी राज्य आयोगों को वार्षिक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड करनी चाहिए। 
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एक दशक में ये बदलाव आए

- फोटो : demo
सीएचआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक 2005-15 तक कुल 1 करोड़ 75 लाख 23 हजार 154 आरटीआई आवेदन आए। कुछ ही आवेदक ऐसे हैं, जिन्होंने एक से ज्यादा बार आरटीआई फाइल की। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 500 रुपये आरटीआई फीस जमा करके सिर्फ एक ही बिंदु पर जानकारी ले सकते हैं। जबकि राज्यसभा-लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभाओं में 10 रुपये आरटीआई फीस तय की गई है।

जम्मू व कश्मीर में 2009 में आरटीआई एक्ट लागू हुआ। प्रदेश में सिर्फ यहां का निवासी ही आवेदन लगा सकता है। जबकि इस प्रदेश को छोड़कर कोई भी व्यक्ति कहीं भी आरटीआई आवेदन लगा सकते हैं। केंद्रीय संस्थानों में सबसे ज्यादा आरटीआई प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा अस्वीकृत की गई।  2014-15 में 22 फीसदी आवेदन पीएमओ ने लौटाए। इस दौरान 12 हजार 674 आरटीआई आवेदन पीएमओ में आए थे।

  एक दशक में ये बदलाव आए 
- वेब पोर्टल के अलावा केंद्रीय संस्थाओं में जन सूचना अधिकारी के ई-मेल पर भी आवेदन दे सकते हैं।
- डीओपीटी के आदेशानुसार आरटीआई आवेदन संबंधित विभाग की वेबसाइट पर कोई भी देख सकता है।
- मंत्रियों व अधिकारियों का वेतन और संपत्ति हर साल वेबसाइट पर दी जाने लगी।
- प्रधानमंत्री के चार्टर्ड प्लेन का खर्च सार्वजनिक किया जाने लगा।
- सभी विधायकों और सांसदों की जरूरी जानकारी सार्वजनिक होने लगी।
- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मंत्रियों को विदेशों से मिलने वाले उपहार का ब्यौरा विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर दिया जाने लगा।
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