केंद्र सरकार के खिलाफ बन रहे माहौल को थामने की कमान
संघ ने अपने हाथ में ले ली है। समाज के बीच चल रही नकारात्मक चर्चाओं को दूर करने के लिए संघ ने सितंबर के अंत में लोक मंथन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसमें भगवा परिवार से जुड़े देशभर के बौद्धिक योद्धा एकत्रित होंगे। संघ के बौद्धिक योद्धाओं का यह आयोजन दो वर्ष पूर्व भोपाल में आयोजित हुआ था। अब अगला आयोजन 29 से 30 सितंबर के बीच रांची में होगा।
बताया जा रहा है कि संघ के शीर्ष नेतृत्व ने इस आयोजन को हरी झंडी दे दी है। लोक मंथन के आयोजन का जिम्मा वैसे तो संघ के बौद्धिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह के प्रमुख जेनंद कुमार के जिम्मे है। लेकिन संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले इस लोक मंथन के पालक अधिकारी हैं। उन्हीं की देखरेख में इस आयोजन की रणनीति बनती है।
सूत्र बताते हैं कि नागपुर में संपन्न अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के तुरंत बाद 15 मार्च को लोक मंथन के आयोजन को लेकर दिल्ली में संघ के शीर्ष अधिकारियों की मैराथन बैठक हुई थी। इस बैठक में ही आयोजन स्थल और तिथि को अंतिम रूप दिया गया। पुराने भाजपा मुख्यालय के समीप 11ए बंगले में बने संघ की संस्था इतिहास संकलन के कार्यालय में 15 मार्च को भगवा परिवार के प्रमुख अधिकारियों की बैठक हुई थी। लोकमंथन को पहले गुवाहाटी में आयोजित करने का निर्णय हुआ था, लेकिन यहां इतिहास संकलन का राष्ट्रीय अधिवेशन होना है। इसलिए इसे रांची में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
सूत्र बताते हैं कि लोकमंथन के आयोजन को लेकर 15 मार्च को संपन्न हुई मैराथन बैठक में संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के अलावा नए सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य, भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे, प्रज्ञा प्रवाह के प्रमुख जेनंद कुमार, इतिहास संकलन के संगठन महामंत्री बालमुकुंद, दिल्ली विश्वविद्यालय के शिव प्रकाश, श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन के अर्निबन गांगुली और संघ विचारक राकेश सिन्हा के अलावा संघ के कुछ और प्रमुख संगठनों के लोग भी बैठक में मौजूद थे।
आखिर क्या है मजबूरी?
RSS-BJP
लोक मंथन के आयोजन की शुरुआत दो वर्ष पूर्व की गई। बौद्धिक जगत में पकड़ मजबूत बनाने की चिंता संघ में वैसे तो लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद पैदा हुए हालातों ने संघ को मजबूर कर दिया। संघ रणनीतिकारों को लगा कि लोकसभा चुनाव 2014 में पराजय के बाद वाम ने यह मान लिया है कि लोकतांत्रिक तरीके में वह भगवा परिवार का मुकाबला नहीं कर सकता है। वह सिर्फ वैचारिक स्तर पर ही संघ और भगवा परिवार को चुनौती दे सकता है।
हैदराबाद के छात्र रोहित वेमुला की कथित आत्म हत्या के मामले और गोरक्षकों की करतूतों को लेकर वाम विचारकों ने मोदी सरकार और भगवा परिवार को पूरी तरह घेरने की सफल कोशिश भी की। इस कोशिश के बाद ही संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के उस विचार को अमल में लाने का निर्णय लिया गया, जिसमें कि देशभर में जिला स्तर पर बौद्धिक योद्धाओं की फौज बनाने का संघ ने निर्णय लिया।
इसमें कला, लेखक, पत्रकार, ब्लॉगर, साहित्य, सामाजिक, शिक्षा, डॉक्टर, वकील सरीखे करीब 10 क्षेत्रों के लोगों की फौज तैयार की गई जो कि समय आने पर अपने-अपने स्तर पर विभिन्न मुद्दों पर संघ और भगवा परिवार की बात रख सकें। इन बौद्धिक योद्धाओं के मिलन के लिए हर दो साल पर लोक मंथन आयोजित करने का निर्णय लिया गया, ताकि तमाम विषयों पर उन्हें दिशा दी जा सके।
ऐसा ही एक आयोजन ज्ञान संगम के नाम से संघ के एक अन्य सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल की देखरेख में होता है। इस आयोजन के कर्ताधर्ता का जिम्मा भी जेनंद कुमार को बनाया गया है। ये भी हर दो वर्ष पर आयोजित होगा। इसका पहला आयोजन बीते वर्ष की शुरुआत में दिल्ली में हुआ था। हालांकि लोक मंथन और ज्ञान संगम का मकसद एक ही है। मगर दोनों के पालक अधिकारी अलग-अलग सह सरकार्यवाह हैं।