RSS Vs CJP: मोहन भागवत के बयान के बाद अभिजीत दीपके का क्रिप्टिक पोस्ट, क्यों लिखा- टू व्हूम इट मे कंसर्न
Fri, 07 Aug 2026 02:11 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्रपति संभाजीनगर / नई दिल्ली
सार
मोहन भागवत के बयान को छात्र आंदोलनों को लेकर चल रही बहस के बीच अहम माना जा रहा है। वहीं, अभिजीत दीपके की संक्षिप्त लेकिन तीखी सोशल मीडिया प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। फिलहाल छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और कथित बाहरी तत्वों की भूमिका को लेकर जांच जारी है, जबकि कई राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के छात्र आंदोलनों को लेकर दिए गए बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने आलोचकों पर परोक्ष निशाना साधा है। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भागवत के बयान से जुड़ी एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'टू व्हूम इट मे कंसर्न…' (जिन्हें समझना है, वे समझ जाएं)। दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले महीने नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा सुधार की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। माना जा रहा है कि उनका यह तंज उन भाजपा नेताओं की ओर था, जिन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और सीजेपी पर 'राष्ट्रविरोधी' ताकतों के साथ जुड़े होने के आरोप लगाए थे।
मोहन भागवत ने क्या कहा?
मुंबई में गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आज की जेन-जी (नई पीढ़ी) पहले की पीढ़ियों से अलग है। उन्होंने कहा कि आज के युवा हर बात का तार्किक जवाब चाहते हैं और केवल इसलिए किसी बात को स्वीकार नहीं करते क्योंकि कोई बड़ा व्यक्ति ऐसा कह रहा है। भागवत ने कहा, 'जेन-जी हमारे ही बच्चे हैं। अगर वे किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करते हैं तो इससे वे राष्ट्रविरोधी नहीं हो जाते। उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी संवाद का एक माध्यम है। विरोध करना गलत नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए'। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की शिक्षा नीति में सुधार की जरूरत है और इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
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VIDEO | Mumbai: On being asked about protests and concerns that protesters may be labelled "anti-national", RSS chief Mohan Bhagwat, while addressing Gen Z and Gen Alpha, says, "...I want to make it clear that if Gen Z engages in any agitation, they are not anti-national. They… pic.twitter.com/XWU9coSnTg
छात्र आंदोलन को लेकर क्या है विवाद?
पिछले महीने सीजेपी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी परीक्षा सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप लगे, जिस पर काफी विवाद हुआ। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों ने भी घुसपैठ की थी और मामले की जांच जारी है।
भाजपा नेताओं ने लगाए थे आरोप
छात्र आंदोलन के दौरान भाजपा के कई नेताओं ने प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि छात्रों के आंदोलन को विदेशी ताकतों और राष्ट्रविरोधी तत्वों ने अपने कब्जे में ले लिया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक कार्यक्रम में कहा था कि 'देश में वायरस और कॉकरोच जैसी पार्टियां आ रही हैं, जो देश को खोखला करना चाहती हैं'।
#WATCH | Warangal, Telangana | BJP National President Nitin Nabin says, "New virus and cockroach like parties are emerging in the country with the aim to destroy it... They are the ones who want to break the country into pieces, and BJP worker will teach them a lesson..." (29.06) pic.twitter.com/mGE7MijJ0M
वहीं, पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भी आरोप लगाया था कि छात्र आंदोलन के दौरान 'राष्ट्रविरोधी गिरोह' फिर सक्रिय हो गए हैं। भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम ने भी दावा किया था कि सीजेपी के आंदोलन में 'राष्ट्रविरोधी तत्व' शामिल थे और विपक्ष पर ऐसे लोगों का साथ देने का आरोप लगाया था।