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संघ किसी के खिलाफ नहीं, हमारा मकसद हिंदुओं को एकजुट करना: भागवत

Sat, 14 Jan 2017 10:53 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोलकाता
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मोहन भागवत - फोटो : ब्यूरो/ आगरा
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि संघ किसी के खिलाफ नहीं है। उसका मकसद सिर्फ देश के हिंदुओं को एकजुट करके ताकतवर बनाना है। उन्होंने कहा कि संघ जब किसी काम को करने की ठान लेता है तो उसे कोई रोक नहीं सकता। वे शनिवार को महानगर के ब्रिगेड परेड मैदान पर संघ की रैली को संबोधित कर रहे थे। लगभग 45 मिनट के अपने भाषण में भागवत का जोर हिंदू एकजुटता पर ही रहा।
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मालूम हो कि कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भागवत की इस रैली के आयोजन की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। लेकिन बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस की आपत्ति को दरकिनार कर इस रैली के आयोजन की सशर्त अनुमति दे दी थी। भागवत ने कहा कि देश में एक-दूसरे का खेल बिगाड़ने की राजनीति सदियों पुरानी है। 

ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के नेता बंगाल में होने वाली सांप्रदायिक घटनाओं के लिए संघ के बढ़ते असर को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। इसी संदर्भ में भागवत ने कहा कि संघ किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। वह तो महज हिंदुओं की एकजुटता के लिए काम कर रहा है।
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हिंदूओं को हर हाल में संगठित होना चहिए

संघ प्रमुख ने कहा कि विश्व का मार्गदर्शन करने वाले हिंदू को हर हाल में संगठित होना चहिए। उन्होंने कहा कि निश्चित लक्ष्य पर बढ़ते रहने से बाधाएं स्वयं मिटती जाती हैं। 

उन्होंने कहा कि आरएसएस हिंदुओं को अपनी रक्षा के लिए एकत्रित होने के लिए प्रेरित करता है न कि किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ का मकसद ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण करना है जो देश के लिए जीएं और देश के लिए मरने को तैयार रहें। 

उन्होंने सवाल उछालते हुए कहा कि देश में हिंदुओं की जैसी स्थिति होनी चाहिए वैसी है। क्या देवी-देवताओं की पूजा करने की पूरी छूट है। उन्होंने कहा कि इससे लिए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालना बेकार है। 

भागवत ने कहा कि अपनी कमजोरी का दोष किसी अन्य को नहीं देना चाहिए। संघ का काम हिंदुओं को संगठित और ताकतवर बनाना है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि दुर्बल होने की गलती नहीं करना। दुर्बलता ही मृत्यु है। अगर हिंदू निर्भय हो जाएंगे तो काफी संकट खुद-ब-खुद कम हो जाएंगे।
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