समलैंगिकता पर दिए अपने बयान पर बहस छिड़ने के एक दिन बाद ही आरएसएस अब उससे पलटता दिख रहा है। आरएसएस के सह सर कार्यवाह दत्रातेत्रय हसबोले ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि समलैंगिकता कोई अपराध तो नहीं लेकिन नैतिक और सामाजिक रूप से गलत है। अपने बयान पर बहस छिड़ने के बाद हसबोले ने ट्वीट करते हुए अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा इसका इलाज दंडात्मक रूप से नहीं मानसिक रूप से किया जाना चाहिए।
बता दें कि इससे पूर्व गुरुवार को एक कार्यक्रम में संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा था कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि सेक्स चयन किसी भी व्यक्ति की निजी आजादी का मसला है। किसी व्यक्ति का सेक्स चयन तब तक अपराध की श्रेणी में नहीं आना चाहिए, जब तक वह किसी दूसरे व्यक्ति के निजी जीवन पर कोई असर ना डाले।
होसबोले ने कहा कि सेक्स चयन बेहद व्यक्तिगत मामला है। किसी सार्वजनिक मंच पर आरएसएस इसे लेकर अपने विचार क्यों रखे? आरएसएस में ऐसे विषयों पर चर्चा नहीं होती और ना ही हम ऐसी कोई चर्चा करना चाहते हैं।
हालांकि इस बयान पर विवाद बढ़ते ही दत्तात्रेय होसबोले ने सफाई देते हुए कहा कि उनका कहने का मतलब था कि समलैंगिंक संबंधों पर कोई सजा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे समाज में समलैंगिंक शादियों के पक्ष में नहीं हैं। कांग्रेस ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से इस बयान पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।