बीजेपी ने पूरे देश में सबसे मजबूत और देशव्यापी पार्टी के रूप में तेजी से अपना मुकाम हासिल किया है, लेकिन पश्चिम बंगाल में पकड़ बनाने के लिए बीजेपी राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) की पीठ पर सवार है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जगह आरएसएस प्रमुख विपक्षी के तौर पर नजर आ रहा है। साथ ही आरएसएस पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए चुनावी जमीन भी तैयार कर रहा है।
हाल ही में राम नवमी के मौके पर आरएसएस ने पूरे राज्य में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर साबित किया है। वहीं, 13 अप्रैल को कांठी दक्षिण विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ पता चलता है कि आरएसएस यहां कितना प्रभावी है।
हालांकि, चुनाव ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 56% वोट हासिल कर जीतने में सफल रही, पर इस वाम किले में बीजेपी 32% वोटों के साथ दूसरी मजबूत पार्टी के तौर पर उभरी। इन परिणामों से वाम और कांग्रेस के हाशिए पर जाने के संकेत साफ दिखाई देते हैं। सीपीआी को जहां केवल 10% वोट मिले तो वहीं कांग्रेस 1.3% वोटों पर सिमट गई।
इकोनाॉमिक टाइम्स के मुताबिक राजनीतिक विश्लेषक और प्रेसिडेंसी कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल अमल मुखर्जी ने बताया कि बंगाली हिंदू बीजेपी की ओर जा रहे हैं। वे वर्तमान सरकार की तुष्टीकरण नीतियों से नाराज हैं।