सूत्रों का कहना है कि इसलिए संघ नेतृत्व की तरफ से तोगड़िया पर दबाव भी डाला जा रहा है कि वह अपने हिंदुत्व के एजेंडे को फिलहाल विराम दें और राम मंदिर निर्माण और हिंदुत्व के अन्य मुद्दों को जल्दी लागू करने का दबाव न बनाएं।
लेकिन तोगड़िया इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने हिंदुत्व समेत अपने जिन आठ बिंदुओं पर शीघ्र अमल के लिए बोलना शुरू किया है उनमें अय़ोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अदालत के फैसले की प्रतीक्षा किए बिना संसद में प्रस्ताव लाकर कानून बनाना, देश भर में गोवध रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी केंद्रीय कानून बनाना और गोरक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को जारी की गई एडवाइजरी को तत्काल वापस लेना, समान नागरिक संहिता लागू करना, जम्मू कश्मीर से धारा 370 अविलंब समाप्त करना, विस्थापित कश्मीरी पंडितों का कश्मीर में पुनर्वास, जिस तरह मुस्लिम युवकों को रोजगार में सहायता देने के लिए अल्पसंख्यक विकास निगम है, उसी तरह करीब दस करोड़ बेरोजगार हिंदू युवकों को रोजगार देने के लिए हिंदू विकास निगम का गठन, किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम देने का 2014 में किया गया वादा पूरा करना और महंगे इलाज से परेशान जनता के लिए सस्ती स्वास्थ्य योजना शुरू करना शामिल हैं।
अब नहीं तो कब...
सूत्रों के मुताबिक भुवनेश्वर में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन में तोगड़िया को पद मुक्त करके हाशिए पर डालने की कोशिश भी की गई जो बैठक में मौजूद विहिप प्रतिनिधियों के भारी विरोध के कारण कामयाब नहीं हो सकी। संघ के शीर्ष नेतृत्व से तोगड़िया लगातार कह रहे हैं कि अब 19 राज्यों और केंद्र में भाजपा की सरकार है तब भी हिंदुत्व के उन कार्यक्रमों को तत्काल अमल में नहीं लाया गया जिनके लिए संघ संस्थापक डा. हेडगेवार से लेकर गुरु गोलवलकर समेत संपूर्ण संघ परिवार ने पिछले 90 वर्षों से लगातार जनमत बनाया और संघर्ष किया, तो कब करेंगे। जबकि संघ नेतृत्व हिंदुत्व पर ज्यादा जोर देकर केंद्र और भाजपा की राज्य सरकारों के लिए कोई परेशानी पैदा नहीं करना चाहता। उसे लगता है कि अगर सरकारें अपना कामकाज ठीक से करेंगी तो जनता उन्हें फिर चुनेगी और हिंदुत्व के मुद्दे भी धीरे धीरे लागू होते जाएंगे।