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हमारा विरोध किसी राजनैतिक दल से नहींः संघ

Sat, 25 Nov 2017 12:43 PM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली 
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आरएसएस कार्यकर्ताओं की एक सभा (फाइल फोटो)
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संघ पर बेशक गांधी का हत्यारा होने और कांग्रेस विरोध के आरोप लगते हैं, लेकिन संघ ने स्पष्ट किया कि हमारा विरोध किसी राजनैतिक दल से नहीं है। संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि हमारे लिए यह मायने नहीं कि सत्ता में कौन रहेगा और कौन नहीं। महत्वपूर्ण ये है कि देश कैसा रहेगा और राष्ट्र में रहने वाले लोग कैसे रहेंगे। यह तय करना पड़ेगा कि सत्ता में देश तोड़ने वाले आएंगे या जोड़ने वाले अथवा देश का मन समझने वाले। 
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कृष्ण गोपाल ने कहा कि हमारा विरोध किसी राजनैतिक दल से नहीं, लेकिन कुछ दल हमेशा हमें विरोधी मानते हैं। हर दफे वे हमें सांप्रदायिक और गैर-राष्ट्रवादी मानते हैं, इसलिए वो जानबूझकर हमारे कार्यकर्ता को भाजपा की ओर धकेल देते हैं। हमारे कार्यकर्ता को अपना बनाने के बजाय वे उन्हें दूर धकेलते हैं। संघ अधिकारी ने कहा कि सत्ता किसी के भी हाथ में रहे मगर देश एक रहना चाहिए। 

असम और पूर्वोत्तर की अनदेखी का छलका दर्द 
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के राजनैतिक सलाहकार रजत सेठी और शुभ्रष्ठा की किताब 'द लास्ट बैटल ऑफ सरायघाट' का लोकार्पण करते हुए कृष्ण गोपाल ने असम और पूर्वोत्तर की अनदेखी का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोग असम की समस्या खत्म करने की बात तो जोर-शोर से करते हैं, लेकिन उन्हें असम की वास्तविक जानकारी नहीं है। असम के लोगों को आज भी इस बात की पीड़ा है कि इतिहास लिखने वालों ने असम के योगदान को कम करके दिखाया है। असम के महान सपूतों और देश के लिए उनके योगदान को गिनाते हुए कृष्ण गोपाल ने कहा कि देशवासियों को इसकी जानकारी रहनी चाहिए। एक सवाल के जवाब में कृष्ण गोपाल ने कहा कि वे सरकार से भी कहते हैं कि इतिहास के सही रूप को  सामने लाना चाहिए। सत्ता किसी के हाथ में रहे लेकिन देश एक रहना चाहिए। 
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कांग्रेस ने नहीं डाला पूर्वोत्तर के कार्यों में खलल 
कांग्रेस पर बेशक संघ का घोर विरोधी होने के आरोप लगते हैं, लेकिन संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा है कि असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में संघ के जरिए करीब 60 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है। अधिकांश समय इन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं। उन्होंने संघ से जुड़ी परियोजनाओं के संचालन में कभी खलल नहीं डाला। पूर्वोत्तर के लिए असम में संघ की सफलता को आधार बताते हुए कृष्ण गोपाल ने कहा कि असम में संघ ने राष्ट्रवाद का भाव पैदा किया है। पहले असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में हमारे स्वतंत्रता दिवस तक के आयोजन नहीं हो पाते थे, लेकिन अब स्वतंत्रता दिवस के दिन असम ही नहीं बल्कि मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में भी लोग तिरंगा लेकर भारत माता की जय करते नजर आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि 1947 में असम के एक भी जिले में मुस्लिम बहुसंख्यक नहीं थे। मगर आज 10 से 12 जिले मुस्लिम बाहुल्य हो गए। एक राष्ट्र, एक भाषा की थ्योरी हमारी नहीं है। यह यूरोप की पद्धति है। हमने पूर्वोत्तर में सभी भाषा और समूहों को एकजुट करते हुए उनमें राष्ट्रवाद का विकास किया है। यह किसी राजनैतिक मकसद के लिए नहीं है, बल्कि राष्ट्रहित के लिए है। 

राम माधव, एन बीरेन सिंह और हेमंत विश्व शर्मा भी रहे मौजूद 
पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर भाजपा महासचिव राम माधव, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और असम के मंत्री हेमंत विश्व शर्मा सरीखे नेता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार शेखर गुप्ता ने किया। संचालन के लिए गुप्ता की उपस्थिति को लेकर सवाल भी उठे, मगर गुप्ता ने बड़ी साफगोई से उन सवालों का जवाब दिया। 
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