संघ की छवि पर किसने बट्टा लगाया? सूत्र बताते हैं आरएसएस इस फर्जी तस्वीर को पचा नहीं पा रहा है। वह इस तरह की फैब्रिकेटेड तस्वीर तैयार और पोस्ट करने वाले का पूरा ब्यौरा चाहता है। समझा जा रहा है कि आरएसएस ने इस संदर्भ में जांच किए जाने की मंशा जाहिर की है।
दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मेहमान थे। संघ एक रचनात्मक संगठन है। प्रणब मुखर्जी के वहां जाने से कांग्रेस पार्टी भी काफी असहज महसूस कर रही थी। कांग्रेस की असहजता के कारण प्रणब के नागपुर जाने की खबर देश और दुनिया के स्तर पर काफी प्रचारित हुई। ऐसे उनकी छवि से खिलवाड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छवि के लिए धक्का है।
पूर्व राष्ट्रपति के संघ मुख्यालय जाने के निर्णय की राजनीति से जुड़े लोगों ने चाहे जितनी आलोचना की हो, लेकिन प्रणब दा ने सबको आईना दिखा दिया। संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में अपनी बात रखी और प्रणब दा ने भारतीय लोकतंत्र को समझाया। हिंसा, घृणा, धर्म और जाति की विभाजनकारी राजनीति और समाज घातक बताया।
प्रणब मुखर्जी के वहां जाने, उन्हें आमंत्रण देने और आमंत्रण स्वीकार कराने के प्रयास तथा प्रणब मुखर्जी को इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि और वक्ता बनाने के लिए संघ प्रमुख के निर्णय की काफी तारीफ हो रही है। हालांकि राजनीतिक दृष्टि से इसे दूसरे नजरिए से देखा जा रहा है।
कांग्रेस का एक धड़ा अब भी मान रहा है कि प्रणब मुखर्जी के नागपुर जाने से आरएसएस की स्वीकार्यता बढ़ेगी। हिन्दुत्व और इसके प्रति कट्टरता से भरे उसके विचारों को देश में जगह बनाने में आसानी होगी। इसके लिए कांग्रेस के नेता तर्क भी देते हैं।
पार्टी के पूर्व महासचिव कहते हैं कि जय प्रकाश नारायण द्वारा 70 के दशक में जनसंघ को अपने आंदोलन में जगह देने के कारण बाद के वर्षो में जनसंघ से लोगों का राजनीतिक छुआछूत खत्म हो गया था। वह मानते हैं प्रणब दा के वहां जाने का कुछ ऐसा ही लाभ आने वाले दिनों में संघ को होने वाला है।