संघ में आने वालों की जाति या धर्म नहीं पूछा जाता
जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछा गया कि क्या मुसलमानों को संघ में शामिल होने की अनुमति है, तो उन्होंने कहा संघ में किसी ब्राह्मण, किसी दूसरी जाति, किसी मुस्लिम या ईसाई को अलग से नहीं लिया जाता। संघ में केवल हिंदू समाज के सदस्य आते हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि संघ में आने वाले व्यक्ति अपनी अलग पहचान घर पर छोड़कर आते हैं।
भागवत ने कहा मुस्लिम हों, ईसाई हों या किसी भी पंथ के लोग सबका स्वागत है। लेकिन शाखा में आने के बाद सब भारत माता के बेटे माने जाते हैं। भागवत ने बताया कि शाखा में आने वाले लोगों से उनकी जाति या धर्म नहीं पूछा जाता। उन्होंने जोड़ा हम यह नहीं गिनते कि कौन किस जाति या धर्म से है। हमारे लिए सब भारत माता के सपूत हैं। यही संघ की कार्यप्रणाली है।
भगवा और तिरंगा दोनों का सम्मान करते हैं
मोहन भागवत ने कहा कि संघ हमेशा से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का सम्मान, श्रद्धांजलि और रक्षा करता आया है। उन्होंने बताया कि 1933 में राष्ट्रीय ध्वज तय करने वाली समिति ने भगवा रंग की सिफारिश भी की थी, लेकिन महात्मा गांधी ने तीन रंगों वाला तिरंगा चुना। भागवत ने कहा हमारा भगवा अपना है और तिरंगा हमारा राष्ट्रीय प्रतीक दोनों में कोई टकराव नहीं है।
पाकिस्तान को तब तक समझाना होगा जब तक वह न बदले
पाकिस्तान के बारे में पूछे जाने पर भागवत ने कहा कि वे मानते हैं कि कभी-कभी पाकिस्तान को वह भाषा समझानी पड़ती है जो वह समझे। उनका मानना है कि बार-बार कोशिशों का जवाब देना चाहिए ताकि उसे समझ आए और वह शान्तिप्रिय पड़ोसी बने। उन्होंने कहा कि असल इच्छा यही है कि दोनों देशों की प्रगति हो और क्षेत्र में शांति कायम रहे।