देश के बौद्धिक आख्यान को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से बदलना आरएसएस के पांच परिवरर्तनों में से एक है। यह कहना है राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले का। दत्तात्रेय मंगलवार को एक साक्षात्कार में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आरएसएस के 'पंच परिवर्तन' के विचार में समाज में 'समरसता' (बंधुत्व के साथ समानता), पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली, पारिवारिकता को बढ़ावा देने के लिए परिवार जागृति पर जोर देना, जीवन के सभी पहलुओं में "भारतीय" मूल्यों पर आधारित 'स्व' की भावना पैदा करना और नागरिक कर्तव्यों के पालन के लिए सामाजिक जागृति शामिल है। आरएसएस महासचिव ने कहा कि पंच परिवर्तन आम तौर पर समाज की जरूरत है।
काम की गुणवत्ता बढ़ने से इसका प्रभाव भी बढ़ेगा
साक्षात्कार में होसबोले ने कहा कि शताब्दी वर्ष के मद्देनजर हमने संगठनात्मक दृष्टिकोण से दो लक्ष्यों की पहचान की है, जिसमें शाखाओं की संख्या बढ़ाने और गतिविधियों में गुणात्मक सुधार शामिल है। आरएसएस के सभी सदस्यों से यह सामान्य लक्ष्य ध्यान में रखने की अपेक्षा की जाती है क्योंकि काम की गुणवत्ता बढ़ने से इसका प्रभाव भी बढ़ेगा। दूसरी बात है कि सामाजिक दृष्टिकोण से हमने 'पंच परिवर्तन' (पांच गुना परिवर्तन) का विषय सामने रखा है। हमारे उद्देश्यों में सामाजिक परिवर्तन के लिए बौद्धिक कथा को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से बदलना और 'सज्जन शक्ति' को संगठित करना शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि आज, राष्ट्रीय विचारों के प्रसार के लिए समय अनुकूल लग रहा है। इसका मतलब यह नहीं कि हम घर बैठकर आराम करें। यह समय अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए सर्वोत्तम है।
100 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना
होसबले ने कहा कि हाल ही में नागपुर में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आयोजित किया गया था। इसके समापन सत्र को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लोकतंत्र की व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को मतदान करने का अपना कर्तव्य पूरा करना चाहिए। हमें 100 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना चाहिए। हमारा उद्देश्य अपने-अपने क्षेत्रों में काम करके लोकतंत्र को मजबूत करना है। ऐसे समय में राष्ट्रीय मुद्दों को समाज के सामने लाना चाहिए और सामाजिक कल्याण, राष्ट्रीय एकता और भारत के कल्याण पर चर्चा होनी चाहिए।