फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

FDI के विरोध में संघ संगठन, कहा- रियल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सरकार

Thu, 11 Jan 2018 12:10 PM IST
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
अर्थव्यवस्था का चेहरा सुधारने के लिए सरकार के जरिए उठाए गए विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाले कदमों का संघ संगठनों ने विरोध किया है। संघ संगठनों का कहना है कि यह कदम महज अर्थव्यवस्था को चमकीला बनाने के लिए उठाए गए हैं। देश की अर्थव्यवस्था पर इन कदमों का असर नहीं होगा। 
विज्ञापन


संघ की संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि सरकार को एफडीआई का मोह त्यागकर रियल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए। भारतीय मजदूर संघ का कहना है कि एफडीआई तो होना ही नहीं चाहिए। इससे देश का भला नहीं होने वाला। पीएम मोदी की अध्यक्षता में संपन्न केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई अहम निर्णय लिए। कैबिनेट ने एकल ब्रांड खुदरा कारोबार और निर्माण क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है।

एयर इंडिया में भी 49 फीसदी एफडीआई की मंजूरी देकर इसके निजीकरण का रास्ता खोल दिया है। इन अहम फैसलों की जानकारी देते हुए सरकार ने देश में रोजगार के अवसर बढऩे की उम्मीद जताई है। मगर सरकार के अपने सहयोगी संगठनों की ही राय इन कदमों के उलट है। विपक्ष के साथ संघ संगठनों ने भी सरकार के कदम की निंदा की है। 
विज्ञापन


रोजगार बढ़ाने वाले कदम उठाए सरकार
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि सरकार को एफडीआई का मोह त्याग कर रियल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए। जीडीपी और एफडीआई केंद्रित अर्थव्यवस्था के बजाय सरकार को यह विचार करना चाहिए कि रोजगार के अवसर कैसे पैदा हों। उन्होंने कहा कि एफडीआई देश का भला नहीं कर सकती है। सरकार को एफडीआई के बजाय रोजगार के अवसर बढ़ाने वाली नीतियों पर कार्य करना चाहिए।

इनोवेटिव कार्यों के साथ निर्यात को बढ़ावा देने का कार्य करना चाहिए। इसके साथ ही आयात की कमी करनी होगी। आयात की कमी से एफडीआई की जरूरत ही नहीं रहेगी। महाजन का कहना है कि एफडीआई का कदम विकास के लिए नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था का गैप पूरा करने के लिए है। केंद्र सरकार की नीयत और दिशा ठीक है, मगर एफडीआई के बदले उसे रियल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर देना चाहिए। एफडीआई पर सरकार का वर्तमान कदम माहौल सुधारने के लिए है। जमीन पर इसके परिणाम मजबूत नहीं होंगे। हमें अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने का कदम उठाना चाहिए। जब अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत रहेगी तो दुनिया के देश झक मारकर निवेश करेंगे। वरना उनकी शर्तों पर आगे बढऩा पड़ेगा।
विज्ञापन

एफडीआई बर्दाश्त नहीं

मजदूर क्षेत्र में कार्य करने वाली संघ की संस्था भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महासचिव बृजेश उपाध्याय ने सरकार के एफडीआई कदम पर कहा कि हमारा संगठन सदैव ही एफडीआई के विरोध में रहा है। कुछ क्षेत्रों में नियम और शर्तें देखकर फैसला संभव है। सरकार के वर्तमान कदम पर उन्होंने कहा कि अभी फैसले का अध्ययन कर वे प्रतिक्रिया देंगे। मगर सूत्र बताते हैं कि एयर इंडिया में विदेशी निवेश के कदम पर मजदूर संघ के तेवर कड़े हैं। जल्द ही सरकार से इस मुद्दे पर संगठन के प्रतिनिधि बातचीत करेंगे। हालांकि सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी विदेशी निवेश का भाजपा भी अब से पहले विरोध करती रही है। 

कांग्रेस ने लगाया यूटर्न लेने का आरोप
विदेशी निवेश पर सरकार के फैसलों की निंदा करते हुए कांग्रेस पार्टी ने भी भाजपा को आईना दिखाया है। कांग्रेस ने भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी पर अपने ही स्टैंड से यू टर्न लेने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली के पुराने बयानों को ट्वीट करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार द्वारा सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी विदेशी निवेश की मंजूरी से पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली की दोहरी नीति सामने आ गई है।

मोदी जी का व्यापारियों और निर्माण क्षेत्र को नुकसान और जेटली जी के अंतिम सांस वाले बयान अंतत: जुमला साबित हुए हैं। कांग्रेस ने आश्चर्य जताते हुए कहा है कि कुछ साल पहले तक केंद्र में यूपीए सरकार के दौरान वर्तमान पीएम और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एफडीआई के सबसे मुखर विरोधी थे। मगर अब उनकी ही अध्यक्षता में कैबिनेट ने खुदरा क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश के फैसले को मंजूरी दी है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें