जरा कल्पना कीजिए - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और देश-काल के प्रति उसके नजरिए के बारे में सवाल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पूछें और जवाब दें सरसंघचालक मोहन भागवत। यह कल्पना हकीकत में बदल सकती है यदि भागवत से संवाद का आमंत्रण राहुल गांधी स्वीकार कर लें। ऐसा ही निमंत्रण मायावती, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, शरद पवार, सीताराम येचुरी जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं को भेजा जा रहा है।
अपने 93 साल के इतिहास में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहली बार देश और ताजा मुद्दों पर अपने नजरिए के बारे में एक बहस का आयोजन कर रहा है। दिल्ली के विज्ञान भवन में 17 से 19 सितंबर तक होने वाले इस आयोजन में समाज के विभिन्न तबकों से लगभग 400 लोगों को आमंत्रित किया जाएगा जिनकी जिज्ञासाओं को खुद संघ प्रमुख शांत करेंगे।
पिछले कुछ समय से राहुल गांधी न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी पर लगातार हमले करते रहे हैं बल्कि संघ पर भी। वे कहते रहे हैं कि देश में दो विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है - पहली जो देश और समाज को एक रखना चाहती है और दूसरी जो देश और समाज को बांटना चाहती है। दो दिन पहले ही लंदन में एक समारोह में बोलते हुए राहुल ने संघ की तुलना अरब देशों में फैले मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी।
यही वजह है कि सामान्यतया मीडिया से दूर रहने वाला संघ अब अपने बारे में सभी भ्रांतियां दूर कर देना चाहता है। इसीलिए उसने तीन दिन तक चलने वाले इस संवाद में समाज के हर तबके के लोगों को आमंत्रित किया है। इसमें लेखक होंगे, प्रोफेसर भी, इतिहासकार होंगे और संगीतकार भी, मीडिया के लोग होंगे तो वकील भी, डॉक्टर होंगे तो उद्योगपति भी।