राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भगवान राम सदैव अस्तित्व में रहे हैं। लेकिन महर्षि वाल्मीकि ने भगवान राम को घर-घर तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने विश्व के दुखों को दूर करने के लिए रामायण की रचना की थी। भारतीयों को मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी के रूप में इस संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए।
संघ प्रमुख ने यहां वाल्मीकि समाज सेवा मंडल की ओर से आयोजित महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह ही हैं जो भगवान राम को हमारे जीवन में लाए। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि ने रामायण लिखी और इसे लोगों के साथ साझा किया क्योंकि उनका हृदय करुणा और अपनेपन की भावना से भरा था।
भगवान राम ने जीने का तरीका सिखाया
संघ प्रमुख ने कहा कि भगवान राम हमें सिखाते हैं कि जीवन कैसे जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामायण हमें बताती है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक-दूसरे के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए। एक आदर्श सेवक कैसा होना चाहिए, एक आदर्श मंत्री को राजा का मार्गदर्शन कैसे करना चाहिए। भगवान राम इन गुणों का उदाहरण हैं, और उनके समर्पित अनुयायी भगवान हनुमान हैं।
रामायण में भक्ति के अनेकों उदाहरण
भागवत ने कहा कि रामायण में विभीषण और सुग्रीव जैसे भक्ति के अनगिनत उदाहरण हैं। जीवन में हर प्रकार के व्यक्ति के लिए, वाल्मीकि की रामायण आचरण का मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने केवल एक कहानी नहीं सुनाई, हमें जीवन के लिए एक शाश्वत संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आध्यात्मिकता, सद्भावना और अच्छे आचरण के लिए प्रसिद्ध है और यह विरासत रामकथा से उपजी है।