राम मंदिर, गंगा और गाय का द्वंद
संघ के प्रचारक सूत्र का कहना है कि जहां भी संघ के कार्यकर्ता गली मोहल्ले में घूम रहे हैं, उनसे राम मंदिर, उ.प्र. में गाय और गौवंश, गंगा की सफाई पर सवाल पूछा जाता है। वह संघ बैठकों में लगातार अपनी चिंता बता रहे हैं। इससे एक स्थिति यह भी बन रही है कि संघ भाजपा के साथ रहेगा, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 की तरह सक्रिय नहीं रहेगा। बताते हैं संघ के भीतर एक बड़ा धड़ा मानकर चल रहा है कि अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी को भी 2019 के चुनाव संघ और संगठन की बहुत जरूरत नहीं पडेगी। वह अपनी क्षमता के आधार पर चुनाव जीत लेंगे।
भाजपा नेताओं की भी है भूमिका
नागपुर से गहरा संबंध रखने वाले सूत्र का कहना है कि भाजपा नेताओं का एक वर्ग संघ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह में दूरी बढ़ाने का भी काम कर रहा है। यह वर्ग लगातार इनके कामकाज, कामकाज के तरीके, चुनौतियों का सामना करने की नीति से पीडि़त है। रोजगार, अर्थ व्यवस्था, जम्मू-कश्मीर को लेकर नीति, राम मंदिर समेत अन्य मुद्दे पर सरकार और भाजपा के पक्ष को लेकर भी आलोचना कर रहा है। इसके कारण यह तल्खी और संवादहीनता बढ़ रही है। सूत्र का कहना है कि आप देखेंगे, पिछले एक दो महीनों से कुछ मंत्रालय के विशेष कामकाज की तारीख करने से केन्द्र सरकार के मंत्री और शीर्ष नेतृत्व परहेज कर रहा है।
भाजपा नेता चुप
संघ प्रमुख के इस तरह के बयान पर भाजपा नेता चुप है। वह इस तरह की बातों पर कोई बयान नहीं देना चाहते। भाजपा के प्रवक्ता भी बचने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा नेता ऑफ द रिकार्ड संघ को सामाजिक, सांस्कृतिक संगठन बताते हुए इसे केवल देश हित में की गई चिंता बताते हैं। अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगडिय़ा का कहना है कि भागवत को जनता को बताना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी और भाजपा उनकी नहीं सुन रही है। वहीं कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि भागवत को भाजपा की नरेन्द्र मोदी सरकार की असलियत का पता चल चुका है। उन्हें एहसास हो रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भजपा को सफलता नहीं मिलने वाली है।