रमण रेती आश्रम में संतों के साथ मोहन भागवत
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में यदि आपके पास कोई गलतफहमी (भ्रांति) है तो सर संघचालक मोहन राव भागवत ने एक तरीका सुझाया है। भागवत का दावा है कि जो इस तरीके को अपनाएगा, संघ को लेकर उसकी सभी गलतफहमियां दूर हो जाएगी। सर संघचालक ने कहा कि संघ में मतभेद हो सकता है। मतभेद होने पर मतभेद होने की गुंजाइश नहीं रहती। विभिन्नता में एकता के सिद्धांत पर चलकर संघ हिन्दू और हिन्दुस्तान को न बदलने वाला सच मानता है।
संघ के बारे में गलत फहमी है तो क्या करें?
सर संघचालक ने लोगों को तरीका बताते हुए कहा कि जिन लोगों के मन में संघ को लेकर गलतफहमिया हैं, वह लोग संघ में आएं। संघ में आकर दो-तीन साल रहें। सर संघ चालक का कहना है कि जो संघ में आकर दो-तीन साल का समय बिताएगा, वह संघ को कुछ जान सकेगा। उन्होंने कहा कि संघ के बारे में गलतफहमी रखने वाले व्यक्ति के दो-तीन साल बिताने के बाद उसकी भ्रांति दूर हो जाएगी। इससे संघ के बारे में उसकी सोच में परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा कि संघ और उसके स्वयंसेवक का जीवन निज स्वार्थ के लिए नहीं है, बल्कि वह लोक कल्याण के लिए जीता है। उन्होंने कहा कि सह संवेदना का अहसास भी सभी स्वयंसेवक की जिम्मेदारी है। इस सार तत्व को संघ में आकर जाना जा सकता है।