संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन भागवत पहले दिन संघ की सौ वर्ष की यात्रा के अनुभव और दूसरे दिन संघ की भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी देंगे। तीसरे दिन संघ प्रमुख कार्यक्रम में शामिल हस्तियों के सवालों का जवाब देंगे।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत 26 से 28 अगस्त तक विज्ञान भवन में सौ वर्ष की संघ : नए क्षितिज विषय पर तीन दिवसीय व्याख्यानमाला में देश के विभिन्न क्षेत्रों की नामचीन हस्तियों से संवाद करेंगे।
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संघ शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन भागवत पहले दिन संघ की सौ वर्ष की यात्रा के अनुभव और दूसरे दिन संघ की भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी देंगे। तीसरे दिन संघ प्रमुख कार्यक्रम में शामिल हस्तियों के सवालों का जवाब देंगे।गौरतलब है कि साल 2018 में भी भागवत ने विज्ञान भवन में ही पहली बार ऐसा ही संवाद किया था। इस संदर्भ में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के तहत देश के सभी जिलों में नागरिक गोष्ठियों के आयोजन का फैसला हुआ था।
इसी क्रम में संघ प्रमुख सबसे पहले राजधानी दिल्ली, इसके बाद नंवबर में बैंगलुरू, दिसंबर में पश्चिम बंगाल और फरवरी में मुंबई में व्याख्यानमाला को संबोधित करेंगे। समाज के सभी क्षेत्रों, वर्गों और विचारधाराओं की प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। इसके लिए सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, खेल, शिक्षा, ज्ञान परंपरा एवं भाषा, इंटरप्रेन्योर और भारत स्थित विभिन्न देशों को राजदूतों सहित 17 मुख्य और 138 सह—श्रेणियों में समाज जीवन के सभी क्षेत्रों की प्रमुख्य हस्तियों को आमंत्रित किया जा रहा है।
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स्व तत्व और पराक्रम अहम
व्याख्यानमाला में संघ प्रमुख विभिन्न हस्तियों के समक्ष विभिन्न विषयों पर संघ की राय, संघ की सौ साल की यात्रा के अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा शताब्दी वर्ष के बाद संघ को जिन क्षेत्रों में आगे बढ़ना है, उसकी भी जानकारी देंगे। आंबेकर ने कहा कि देश में आगे बढ़ने की आकांक्षा और आशा बढ़ी है। ऐसे में देश के उज्जवल भविष्य में संघ की भूमिका पर भी भागवत अपने विचार रखेंगे। संघ प्रमुख ने कई बार कहा है कि देश को नए क्षितिज पर ले जाने के लिए स्व तत्व और अपना पराक्रम ही काम देगा। समाज के विभिन्न वगों के बीच एकजुटता, सांप्रदायिक सद्भाव भी आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है। व्याख्यानमाला में गुलामी के समय से चले आ रहे विकास के ओपनिवेशिक मापदंडों और अब तक दबी चली आ रही भारतीय समाज की असीमित क्षमताओं को उभारने पर भी विचार किया जाएगा।