राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में कहीं भी 'जिहादी ताकतों' द्वारा सरस्वती पूजा समारोह को रोकने के किसी भी प्रयास को राज्य सरकार को विफल करना चाहिए।
कुछ स्कूलों और कॉलेजों में पूजा के आयोजन पर आपत्तियों के बारे में पूछे जाने पर, आरएसएस के बंगाल महासचिव जिष्णु बसु ने कोलकाता में संवाददाताओं से कहा, 'पड़ोसी बांग्लादेश की तरह, जिहादी तत्व विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा रोकने की साजिश कर रहे हैं, जिसका राज्य सरकार को उचित तरीके से विरोध करना चाहिए।'
बंगाल की संस्कृति और विरासत पर हमला न हो
बसु ने शुक्रवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा, 'जिहादी ताकतें चिंता का कारण बन गई हैं। हम ऐसी स्थिति नहीं देखना चाहते हैं जहां ऐसे तत्व पैर जमा सकें। राज्य सरकार की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि बंगाल की संस्कृति और विरासत पर हमला न हो और हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा हो।'
जिहादी तत्वों पर नजर रखे बंगाल सरकार
बसु ने कहा कि आरएसएस का किसी सरकार से कोई झगड़ा नहीं है, लेकिन वह केवल यह चाहता है कि बंगाल में पूजा उत्सवों को रोकने के लिए काम करने वाले तत्वों पर नजर रखी जाए, उनकी संबद्धता की पहचान की जाए और राज्य इस मुद्दे को दृढ़ता से संबोधित करे ताकि अन्य समुदायों की तरह हिंदुओं के पूजा करने के अधिकार को कोई भी रोक न सके।
हमारा किसी सरकार से कोई झगड़ा नहीं: बसु
उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में, हमारा किसी सरकार से कोई झगड़ा नहीं है। केरल में हमारा एक मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क है, जहां वामपंथी शासन है। पश्चिम बंगाल में, हमारी बड़ी उपस्थिति है, और राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है। कोई भी पार्टी हमारी दुश्मन नहीं है।
इन जिलों में विवाद की खबरों का दिया हवाला
बसु ने किसी स्थान का नाम नहीं लिया, लेकिन वह नादिया जिले के हरिंगघाटा में एक प्राथमिक विद्यालय, कोलकाता में एक लॉ कॉलेज और बीरभूम में एक प्राथमिक विद्यालय में सरस्वती पूजा मनाने को लेकर विवाद की खबरों का हवाला दिया।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जरूरत
बसु ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि चिन्मय कृष्ण दास जैसे भिक्षुओं की गिरफ्तारी और उन्हें लगातार जेल में रखना दर्शाता है कि मौजूदा अंतरिम सरकार हाल के दिनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को उचित न्याय नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ विरोध कर सकते हैं और उम्मीद कर सकते हैं कि अल्पसंख्यकों के साथ न्याय होगा और उनके अधिकार सुनिश्चित होंगे।