दरअसल भाजपा और कांग्रेस दोनों को पता था कि अगर उसने इस चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा तो यूपीए और राजग के बाहर के दलों का समर्थन हासिल करना मुश्किल होगा। भाजपा ने इस रणनीति के तहत अपनी सहयोगी जदयू के हरिवंश का नाम आगे किया। कांग्रेस ने भी व्यापक विचार विमर्श के बाद एनसीपी की वंदना चौहान को विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनाने की पहल की।
ग्रेस के रणनीतिकारों को लगता था कि एनसीपी उम्मीदवार के बहाने पवार शिवसेना को राजग से तोडने के अलावा बीजेडी, टीआरएस जैसे दलों का भी समर्थन हासिल कर लेंगे। हालांकि बीजेडी-टीआरएस के कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के नाम पर ना से न सिर्फ कांग्रेस की रणनीति पटरी से उतरी, बल्कि शिवसेना ने भी राजग उम्मीदवार को समर्थन की घोषणा कर दी।
चुनाव में राजग का गणित
उच्च सदन में राजग के 89 (भाजपा 73, जदयू 6, शिवसेना-अकाली दल 3-3, आरपीआई समेत चार छोटे दल के 4) सदस्य हैं। राजग को तीन मनोनीत और चार निर्दलीय सांसदों के समर्थन से यह संख्या 96 तक पहुंच जाती है। इसके इतर राजग उम्मीदवार को चार दलों (अन्नाद्रमुक 13, बीजेडी 9, टीआरएस 6 और वाईएसआर कांग्रेस 2) के 30 सांसदों का भी समर्थन हासिल है। इस प्रकार यह संख्या 126 हो जाती है जो कि जीत के लिए जरूरी 123 वोटों से 3 ज्यादा है। भाजपा की कोशिश आईएनएलडी का भी समर्थन हासिल करने की है, जिसका उच्च सदन में एक सदस्य है।