भारत सरकार ने हाल ही में एक बड़ा रक्षा सौदा मंजूर किया है, जिसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 156 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर्स (एलसीएच) बनाने का आदेश दिया गया है। इस सौदे की कुल कीमत 62,500 करोड़ रुपये है। खास बात यह है कि इसमें से करीब 25,000 रुपये करोड़ का काम प्राइवेट कंपनियों को दिया जाएगा।
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी
यह सौदा शुक्रवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) ने मंजूर किया और उसी दिन रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच अनुबंध भी साइन हुआ। यह सौदा भारतीय सेना और वायुसेना दोनों के लिए है।
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एलसीए मॉडल की तरह होगा प्रोजेक्ट का संचालन
एचएएल इस प्रोजेक्ट में 'लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (एलसीए) मॉडल की तर्ज पर काम करेगा। इसका मतलब है कि हेलिकॉप्टर के अलग-अलग हिस्सों जैसे कि धड़, पंख आदि को बनाने का काम निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा। एचएएल इन हेलिकॉप्टरों का निर्माण अपने बंगलूरू और तुमकुर में मौजूद फैक्ट्रियों में करेगा। ये दोनों फैक्ट्री कर्नाटक राज्य में हैं।
किन कंपनियों को मिलेगा काम?
एलसीए प्रोजेक्ट में भी कई प्राइवेट कंपनियों को शामिल किया गया था, जैसे कि लार्सन एंड टुब्रो और वेम टेक्नोलॉजीज। अब एलसीएच प्रोजेक्ट में भी एचएएल इसी तरह का मॉडल अपनाएगा और जल्दी ही निजी कंपनियों के लिए टेंडर जारी करेगा। इस पूरे 62,500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में से लगभग 40 प्रतिशत काम निजी उद्योगों को दिया जाएगा, जिसकी कीमत लगभग 25,000 करोड़ रुपये बैठती है। इससे देश के रक्षा क्षेत्र में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी और रक्षा निर्माण क्षेत्र का विस्तार होगा।
रक्षा मंत्री ने सराहा निजी कंपनियों का योगदान
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एलसीए एमके1ए के लिए प्राइवेट कंपनी अल्फा टोकोल इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से बनाए गए पहले रियर फ्यूजलेज (पिछला हिस्सा) की डिलीवरी के मौके पर मौजूद रहकर निजी कंपनियों की भागीदारी की सराहना की।
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एचएएल के पास अब तक के सबसे बड़े ऑर्डर
एचएएल फिलहाल देश की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी है और इसके पास 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑर्डर बुक है। इसके अलावा आने वाले समय में इसे 70,000 करोड़ रुपये तक के नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। इस ऑर्डर बुक में 12 सुखोई-30 लड़ाकू विमानों और 83 एलसीए लड़ाकू विमानों का कॉन्ट्रैक्ट शामिल है। इनमें से 10 विमान ट्रेनर होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा।