सिर्फ 20 रुपये की रिश्वत के आरोप में गुजरात के पुलिस कांस्टेबल बाबूभाई प्रजापति ने करीब 30 साल कानूनी लड़ाई और जेल में सजा काटी। हाईकोर्ट ने चार फरवरी को गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया और उन्हें बेगुनाह करार दिया। फैसले के अगले ही दिन बाबू भाई का निधन हो गया।
यह कहानी असल जिंदगी की एक फिल्म जैसी है। अंतर बस इतना है कि इसका अंत और बेहतर हो सकता था। अगर यह व्यक्ति कुछ दिन और जीवित रहता। गुजरात में एक व्यक्ति ने केवल 20 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में 30 साल जेल में बिताए। अब जाकर उसे बेगुनाह घोषित किया गया है। यह मामला 1994 की उस हॉलीवुड फिल्म से मिलता-जुलता लग रहा है, जिसमें एक निर्दोष व्यक्ति लंबे समय तक जेल में रहता है।
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गुजरात हाईकोर्ट ने चार फरवरी को अपने फैसले में व्यक्ति निर्दोष करार दिया। फैसले के बाद उसने कहा था, मेरे जीवन से कलंक हट गया है। अब अगर भगवान भी मुझे अपने पास बुला लें, तो मुझे कोई दुख नहीं होगा।
1996 में क्या हुआ था?
पुलिस कांस्टेबल बाबूभाई प्रजापति अहमदाबाद में तैनात थे।
उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने 20 रुपये की रिश्वत ली थी।
यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया।
1997 में सत्र न्यायालय में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ।
2002 में आरोप तय किए गए। 2003 में गवाहों की सुनवाई शुरू हुई।
2004 में सत्र न्यायालय ने बाबूभाई प्रजापति को दोषी ठहराया।
उन्हें चार साल की जेल और 3,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
इसके बाद प्रजापति ने गुजरात हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी। लेकिन उनकी अपील 22 साल तक लंबित रही।
आखिरकार चार फरवरी को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया और उन्हें बेगुनाह घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा।
फैसले के अगले ही दिन गई जान
प्रजापति के वकील नितिन गांधी ने अदालत को बताया कि पूरा मामला केवल शक के आधार पर था। फैसले के बाद बाबूभाई प्रजापति ने अपने वकील के कार्यालय में भावुक होकर बातें बताईं। इसके बाद वह अपने घर लौट गए। अगले ही दिन उनकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई। उनके शुभचिंतकों ने कहा कि काश वे कुछ दिन और जीवित रहते। वकील ने बताया, कल जब वह मेरे कार्यालय आए थे, तो बहुत खुश थे। उन्हें बरी किया गया था।
वकील ने कहा, मैंने उनसे कहा कि आप सरकार से मिलने वाले सभी लाभों के लिए आवेदन करें। अगले दिन मैंने उन्हें फोन किया, तो पता चला कि दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।