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CRPF: सीआरपीएफ में यौन शोषण! 'पति-पत्नी और वो' के चक्कर में नप गए कमांडेंट, जानिए पर्दे के पीछे के किरदार

सार

सीआरपीएफ की 187 बटालियन, जिसके कई अफसर जम्मू सेक्टर में 'आरओपी' जेल सिक्योरिटी जैसी अहम ड्यूटी का निर्वहन करते रहे हैं। जुलाई में भी इस मामले को लेकर बल के जिम्मेदार अफसरों के बीच पत्राचार हुआ था। इस बाबत आईजी 'पर्स' ने जेएंडके जोन के स्पेशल डीजी को कई सिफारिशें की थीं।
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सीआरपीएफ (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
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विस्तार
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में 187 बटालियन के कमांडेंट सुरेंद्र सिंह राणा को यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। जम्मू-कश्मीर में उधमपुर पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 509, 354ए और 354डी के तहत केस दर्ज किया था। सीआरपीएफ ने इस मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं। आईजी सोनल मिश्रा की अध्यक्षता में दो सदस्यीय दल, केस की जांच करेगा। दल की दूसरी सदस्य अपर्णा हैं। 

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खास बात यह है कि कमांडेंट, 'पति-पत्नी और वो' के चक्कर में नप गए हैं। सीआरपीएफ में यौन शोषण की इस कहानी में पर्दे के पीछे के किरदारों की दास्तां भी अनूठी है। जिस महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया है कि वे भी 187 बटालियन में बतौर सहायक कमांडेंट तैनात रही हैं। सीआरपीएफ जेएंडके जोन के एडीजी दलजीत सिंह ने कहा कि इस केस की जांच उधमपुर पुलिस कर रही है। विभागीय स्तर पर भी महिलाओं से जुड़े गम्भीर मामलों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है।
 
यौन शोषण से पहले बटालियन में क्षेत्रवाद  
सीआरपीएफ की 187 बटालियन, जिसके कई अफसर जम्मू सेक्टर में 'आरओपी' जेल सिक्योरिटी जैसी अहम ड्यूटी का निर्वहन करते रहे हैं। जुलाई में भी इस मामले को लेकर बल के जिम्मेदार अफसरों के बीच पत्राचार हुआ था। इस बाबत आईजी 'पर्स' ने जेएंडके जोन के स्पेशल डीजी को कई सिफारिशें की थीं। वहां तैनात डिप्टी कमांडेंट सरोज सिहाग और उनके पति सहायक कमांडेंट सतीश सिहाग का नाम भी उस पत्र में लिखा गया था। ये दोनों अफसर विभागीय जांच का सामना कर रहे थे। इन पर आरोप लगा था कि ये अपनी बटालियन में क्षेत्रवाद फैला रहे हैं। कमांडेंट सुरेंद्र राणा भी इनके प्रति सॉफ्ट रवैया रखते हैं। वजह, ये सभी अफसर हरियाणा से आते हैं। पत्र में लिखा था कि इन सबकी गतिविधियां, यूनिट का माहौल बिगाड़ रही थी। 
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सीओ व तीन अन्य अफसरों को बाहर भेज दिया गया 
इसके बाद सहायक कमांडेंट उज्जवला चंद्रा ने 187 वीं बटालियन में ज्वाइन किया। यह देखा गया कि कमांडेंट, उक्त महिला अधिकारी पर कुछ ज्यादा ही मेहरबानी दिखा रहे थे। कुछ ऐसी ही गलतफहमी के चलते सीओ की पत्नी ने वहां हंगामा कर दिया था। उसने आत्महत्या करने का प्रयास किया। आपात स्थिति के चलते सीओ सुरेंद्र सिंह राणा की छुट्टी मंजूर की गई। जवानों के बीच ऐसे माहौल को देखते हुए आईजी 'पर्स' ने सिफारिश की थी कि जल्द से जल्द सतीश सिहाग, सरोज सिहाग और उज्जवला चंद्रा का तबादला, जम्मू सेक्टर से बाहर कर दिया जाए। 

इस मामले में सीओ सुरेंद्र सिंह का तबादला 187 बटालियन से झारखंड सेक्टर दफ्तर में हुआ था, लेकिन उन्होंने कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया। डिप्टी कमांडेंट सरोज सिहाग को 38 वीं बटालियन में, जबकि उनके पति सहायक कमांडेंट सतीश सिहाग को 76 वीं बटालियन में भेजा गया। सहायक कमांडेंट उज्जवला चंद्रा को भी अगस्त के दौरान अस्थायी तौर पर ग्रुप सेंटर 'हीरानगर' में तैनात कर दिया गया। 

उज्जवला चंद्रा के पति भी सीआरपीएफ में अधिकारी हैं
उज्जवला चंद्रा के पति राज आर्यन '46 बैच डीएजीओ' भी सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट हैं। बता दें कि बल में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। आईजी खजान सिंह, जिन्हें सील्ड कवर में पदोन्नति दे दी गई, उनका यौन शौषण का मामला कई वर्षों से लंबित है। बल के पूर्व अफसरों का कहना है कि वे बल में यौन शोषण केस के रिंग लीडर रहे हैं, लेकिन सिंह की पहुंच के चलते उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके विपरित इस मामले की जांच कर रही महिला अधिकारी का तबादला कर उन्हें प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया। ये मामला अभी दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष है। 

ऐसे अफसरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो
इससे पहले हैदराबाद में सीआरपीएफ डीआईजी संदीप यादव को गंभीर आरोपों के चलते नौकरी से बाहर किया गया है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने सिपाही विजय कुमार के खिलाफ रेप का केस दर्ज किया है। सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एसएस संधू कहते हैं, ऐसी घटनाएं बल की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती हैं। बल को ऐसे अफसरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। अगर इन्हें दंडित नहीं किया गया तो बल के प्रति आम जनमानस में गलत संदेश जाएगा। इससे बल में अनुशासन खत्म होता है। ऐसे अफसरों को नियमानुसार घर भेज देना चाहिए।

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