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Nameplate Row: दुकान के आगे नाम लगाने वाले आदेश पर क्यों हो रहा विवाद? जानें अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 19 Jul 2024 06:41 PM IST

सार

Kanwar Route Nameplate Row: मुजफ्फरनगर पुलिस ने कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले सभी होटलों, ढाबों और ठेलों समेत सभी भोजनालयों को अपने मालिकों या इन दुकानों पर काम करने वालों के नाम लिखने का आदेश दिया। इस फरमान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। आइये इस पूरे विवाद को समझते हैं...
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कांवड़ यात्रा के मार्ग - फोटो : AMAR UJALA
कांवड़ मार्गों पर स्थित दुकानों पर मालिक के 'नेमप्लेट' लगाने के आदेश को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। यह आदेश पहले केवल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के लिए था लेकिन अब इसे राज्यभर में लागू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूरे यूपी में कांवड़ मार्गों पर खाने पीने की दुकानों पर संचालक मालिक का नाम पहचान लिखना होगा। ऐसा ही आदेश उत्तराखंड में हरिद्वार पुलिस प्रशासन ने भी जारी किया है। 

हालांकि, तमाम विपक्षी दलों ने 'नेमप्लेट' वाले आदेश का कड़ा विरोध किया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों अखिलेश यादव और मायावती समेत कई विपक्षी नेताओं ने इसे सामाजिक सौहर्द बिगाड़ने वाला फरमान बताया है। उधर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कांवड यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए लिया गया है। 


आइये जानते हैं कि दुकानदारों के नाम लगाने का विवाद क्या है? यह कहां से शुरू हुआ क्यों शुरू हुआ? किसने मांग की थी? राजनीति क्या हो रही है?
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कांवड़ यात्रा के मार्ग - फोटो : AMAR UJALA
कांवड़ मार्गों पर स्थित दुकानों पर मालिक के 'नेमप्लेट' लगाने के आदेश को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। यह आदेश पहले केवल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के लिए था लेकिन अब इसे राज्यभर में लागू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूरे यूपी में कांवड़ मार्गों पर खाने पीने की दुकानों पर संचालक मालिक का नाम पहचान लिखना होगा। ऐसा ही आदेश उत्तराखंड में हरिद्वार पुलिस प्रशासन ने भी जारी किया है। 

हालांकि, तमाम विपक्षी दलों ने 'नेमप्लेट' वाले आदेश का कड़ा विरोध किया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों अखिलेश यादव और मायावती समेत कई विपक्षी नेताओं ने इसे सामाजिक सौहर्द बिगाड़ने वाला फरमान बताया है। उधर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कांवड यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए लिया गया है। 

आइये जानते हैं कि दुकानदारों के नाम लगाने का विवाद क्या है? यह कहां से शुरू हुआ क्यों शुरू हुआ? किसने मांग की थी? राजनीति क्या हो रही है?

पहले जानते हैं कि कांवड़ यात्रा क्या होती है?
इस साल 22 जुलाई 2024 से सावन की शुरुआत हो रही है। सावन का महीना शुरू होते ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है। सावन के महीने में पूरे उत्तर भारत समेत अन्य राज्यों से कांवड़िये किसी पवित्र धाम जाते हैं और वहां से गंगाजल लाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। हर साल श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवड़िए सुदूर स्थानों से आकर गंगाजल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके भोले बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। इस यात्रा को कांवड़ यात्रा बोला जाता है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते हैं। कांवड़ चढ़ाने वाले लोगों को कांवड़ियां कहा जाता है। ज्यादातर कांवड़ियां केसरी रंग के कपड़े पहनते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा करने से भगवान शिव सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं और जीवन के सभी संकटों को दूर करते हैं। 

अब जानते हैं कि कांवड़ मार्गों पर दुकानों पर 'नेमप्लेट' का विवाद क्या है?
दरअसल, बीते दिनों उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर पुलिस ने कांवड़ यात्रा को लेकर एक निर्देश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले सभी होटलों, ढाबों और ठेलों समेत सभी भोजनालयों को अपने मालिकों या इन दुकानों पर काम करने वालों के नाम प्रदर्शित करना होगा।

निर्देश के बारे में मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने कहा, 'जिले में सावन महीने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कांवड़ यात्रा मार्ग का करीब 240 किलोमीटर का हिस्सा जिले में आता है। मार्ग पर पड़ने वाले सभी होटलों, ढाबों और ठेलों समेत सभी भोजनालयों को अपने मालिकों या इन दुकानों पर काम करने वालों के नाम प्रदर्शित करने को कहा गया है।'

एसएसपी ने आगे कहा, 'ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि कांवड़ियों के बीच कोई भ्रम की स्थिति न हो और कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति उत्पन्न न हो। सभी लोग स्वेच्छा से इसका पालन कर रहे हैं।'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
मुजफ्फरनगर के बाद पूरे यूपी के लिए क्या आदेश आया?
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक नया आदेश जारी किया गया। इस आदेश में कहा गया, 'यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रियों के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्यभर में कांवड़ मार्गों पर खाने-पीने की दुकानों पर 'नेमप्लेट' लगाना होगा। कांवड़ यात्रियों की आस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। हलाल सर्टिफिकेशन वाले उत्पाद बेचने वालों पर भी कार्रवाई होगी।'

उत्तराखंड में हरिद्वार में क्या आदेश आया है?
हरिद्वार पुलिस प्रशासन ने रेस्तरां मालिकों को कांवड़ यात्रा मार्ग पर नाम प्रदर्शित करने का आदेश जारी किया है। हरिद्वार एसएसपी पद्मेंद्र डोबाल ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, 'कांवड़ की तैयारियों के संबंध में जो होटल, ढाबे, रेस्तरां और कांवड़ मार्ग पर जो रेहड़ी-पटरी वाले हैं उन्हें हमारे द्वारा सामान्य निर्देश दिया गया है कि वे अपनी दुकानों पर मालिक का नाम लिखेंगे।

एसएसपी ने आगे कहा, 'ऐसा न करने पर उनके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे... कई बार इसके कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है इसलिए हमारे द्वारा यह निर्णय लिया गया है।'

दुकानदारों के नाम लगाने की मांग की किसने की थी?
यशवीर आश्रम बघरा के संचालक स्वामी यशवीर महाराज ने अधिकारियों से मिलकर कांवड़ मार्ग की दुकानों के दुकानदारों के नाम प्रदर्शित करने की मांग रखी थी। उन्होंने एसएसपी अभिषेक सिंह से भी मुलाकात की थी। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी यह मुद्दा उठाया था। 

अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
आदेश पर विवाद क्या है?
मुजफ्फरनगर से शुरू हुए आदेश के बाद तमाम विपक्षी दलों ने भाजपा सरकारों को कटघरे में खड़े करना शुरू कर दिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा, 'यह मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार की दिशा में उठाया कदम है या दलितों के आर्थिक बहिष्कार का, या दोनों का, हमें नहीं मालूम। जो लोग यह तय करना चाहते थे कि कौन क्या खाएगा, अब वो यह भी तय करेंगे कि कौन किससे क्या खरीदेगा?'

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सामाजिक सद्भाव की दुश्मन है। समाज का भाईचारा बिगाड़ने का कोई न कोई बहाना ढूंढ़ती रहती है। उन्होंने यह मांग की कि न्यायालय स्वतः संज्ञान ले और प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जांच करवाकर उचित कार्रवाई करे।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने 'नेमप्लेट' वाले आदेश को 'धर्म विशेष के लोगों का आर्थिक बहिष्कार करने का प्रयास' करार दिया। उन्होंने एक एक्स पोस्ट में कहा कि यूपी और उत्तराखण्ड सरकार द्वारा कांवड़ मार्ग के व्यापारियों को अपनी-अपनी दुकानों पर मालिक व स्टाफ का पूरा नाम प्रमुखता से लिखने और मांस बिक्री पर भी रोक का यह चुनावी लाभ हेतु आदेश पूर्णतः असंवैधानिक है। इसके अलावा, एनडीए में सहयोगी जदयू, लोजपा (आर) और रालोद ने भी फैसले पर आपत्ति जताई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
विवाद पर प्रशासन का क्या कहना है?
जिस आदेश पर विवाद की शुरुआत हुई वह आदेश मुजफ्फरनगर पुलिस का था। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस प्रशासन ने अपना पक्ष रखा। पुलिस ने एक बयान में बताया कि श्रावण कांवड़ यात्रा के दौरान समीपवर्ती राज्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश होते हुए भारी संख्या में कांवड़िये हरिद्वार से जल उठाकर मुजफ्फरनगर जनपद से होकर गुजरते हैं।

पुलिस ने कहा, 'श्रावण के पवित्र माह में कई लोग खासकर कांवड़िये अपने खानपान में कुछ खाद्य सामग्री से परहेज करते हैं। पहले ऐसे मामले सामने आये हैं जहां कांवड़ मार्ग पर हर प्रकार की खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के नाम इस प्रकार से रखे गए जिससे कांवड़ियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होकर कानून -व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई। इस प्रकार की पुनरावृत्ति रोकने और श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले होटल, ढाबे और खानपान की सामग्री बेचने वाले दुकानदारों से अनुरोध किया गया है कि वे स्वेच्छा से अपने मालिक और काम करने वालों का नाम प्रदर्शित करें।'

पुलिस का दावा है कि इस आदेश का मतलब किसी प्रकार का धार्मिक विभेद ना होकर सिर्फ मुजफ्फरनगर जनपद से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, आरोप-प्रत्यारोप और कानून व्यवस्था की स्थिति को बचाना है। यह व्यवस्था पहले भी प्रचलित रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा है कि कांवड़ यात्रियों की आस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसके अलावा हरिद्वार प्रशासन ने फैसले के बचाव में कहा कि विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो, इसलिए  यह निर्णय लिया गया है।
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