जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रोशनी एक्ट को रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वालों के खिलाफ प्रशासनिक दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को शीर्ष अदालत को यह जानकारी दी।
जस्टिस एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली पीठ को जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया, हाईकोर्ट के नौ अक्तूबर के आदेश के खिलाफ वहां याचिका लंबित है और उस पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी है। पीठ ने गौर किया कि पुनर्विचार याचिका अभी हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए नहीं आई है, लिहाजा याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि पिछली सुनवाई में मेहता के बयान के अनुसार उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। दरअसल, 10 दिसंबर को सुनवाई के दौरान मेहता ने कोर्ट को बताया था कि मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने वाले याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी क्योंकि वे भूमि पर कब्जा करने वाले अनधिकृत लोग नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट को रोशनी एक्ट को खत्म करने के फैसले को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला लेने को कहा था।