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दलित नहीं था रोहित वेमुला, सरकार के जांच पैनल ने रिपोर्ट में किया दावा

Wed, 24 Aug 2016 12:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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रोहित वेमुला
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आत्महत्या करने वाले रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमूला की जाति को लेकर अब एक और रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। रोहित को आत्महत्या के लिए उकसाने वाली परिस्थितियों की जांच करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 26 साल का रोहित अनुसूचित जाति से नहीं था। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित ने इस साल जनवरी में आत्महत्या कर ली थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला दलित नहीं था।
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अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज एके रूपनवाल को एक सदस्यीय जांच कमिशन के लिए नियुक्त किया गया था। जांच पैनल ने अपनी रिपोर्ट अगस्त में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) को सौंपी थी।
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क्यों अहम हो गई रोहित की जाति?

रोहित वेमुला की मां और भाई बौद्ध धर्म अपनाने जा रहे - फोटो : Reuters
रोहित दलित नहीं था, यह इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि छात्र की जाति से उसकी आत्महत्या का संबंध स्थापित करने पर विवाद हुआ था। केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और थावर चंद गहलोत ने कहा था कि रोहित वेमुला वडेरा समुदाय से है जो ओबीसी वर्ग के तहत आने वाली जाति है और उसकी आत्महत्या को जातीय भेदभाव के परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री बंडारु दत्तात्रेय और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वीसी अप्पा राव के खिलाफ एफआईआर एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुई है। उन्हें आत्महत्या के लिए उसकाने के लिए आरोपी बनाया गया है।

वहीं रोहित के भाई राजा का कहना है, 'हम दलितों की तरह ही रहे हैं। हम दलित समुदाय में ही पले-बढ़े हैं। हां, मेरे पिता ओबीसी से थे हम अपने अनुभवों से दलितों की तरह ही जिए हैं। जीवनभर हमारे साथ जातिगत भेदभाव होता रहा। रोहित ने अपने लेटर में भी ये लिखा है।'
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