महाराष्ट्र में इन दिनों राजनीति जोरों पर है, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट का विस्तार हो गया है जिसमें अजित गुट के कई नेताओं को जगह दी गई है। जिसको लेकर शरद पवार के पोते रोहित पवार ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शिंदे गुट में शामिल हुए एनपीसी के मंत्रियों के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है। साथ ही कहा कि भाजपा द्वारा पैदा किए गए झगड़े में एनसीपी और उनका परिवार हताहत हुआ है।
रोहित पवार ने कहा कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार का माननाहै कि भाजपा ने परिवार और पार्टी को तोड़ दिया है। अगर भाजपा सबके प्रति जवाबदेह है तो मुख्य निशाना भी भाजपा ही होगी। भाजपा हमेशा उद्धव ठाकरे और शिंदे गुट के बीच झगड़ा पैदा करने की कोशिश करेगी। भाजपा समय बर्बाद करने के लिए एनसीपी के मंत्रियों और शिंदे गुट में शामिल हुए लोगों के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है...इस सब में भाजपा जो मुख्य निशाना है वो किनारे हो जाती है।
शरद पवार को झटका देते हुए वरिष्ठ नेता अजीत पवार विधायकों के एक समूह के साथ भाजपा के नेतृत्व वाली एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नौ विधायकों को शामिल करने के तुरंत बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में एक बड़े कैबिनेट विस्तार में, नए उपमुख्यमंत्री अजित पवार को वित्त और योजना मंत्रालय सौंपा गया है। 2 जुलाई को, एनसीपी नेता अजित पवार ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और पार्टी के आठ अन्य विधायक भी राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में शामिल हुए थे।
भाजपा कर रही लोकतंत्र को प्रभावित
राकांपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य जनार्दन वाघमारे ने भाजपा पर रविवार को बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा सरकार ने पिछले नौ वर्षों में लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। साथ ही कहा कि भाजपा के कार्यों ने समाज में विभाजन पैदा किया है और विचारधारा और नैतिकता से रहित राजनीति को जन्म दिया है।
वाघमारे ने कहा कि हम लगातार लोकतंत्र के बारे में बात करते हैं लेकिन यह वर्तमान में खतरे में है। भारतीय राजनीति ने एक अवांछनीय मोड़ ले लिया है। विचारधारा के साथ-साथ नैतिकता भी जरूरी है, लेकिन दुर्भाग्य से आज की राजनीति में ऐसा कुछ भी नहीं है। शक्तियों का इस्तेमाल धर्मों, समुदायों को विभाजित करने के लिए किया जा रहा है, जो संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। संविधान धर्मनिरपेक्षता पर आधारित है, लेकिन इसका आधार नष्ट किया जा रहा है।