म्यामार से भागकर आए रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत की नाक में दम कर रखा है। शरणार्थी की तरह जान बचाकर भारत आया यह समुदाय जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में जाकर बस गया है और वहां अमन स्थापित करने में चुनौती बन गया है।
भारत इन्हें वापस म्यामार भेजना चाहता है लेकिन अपने जान माल का हवाला देकर रोहिंग्या जाने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में रोहिंग्या की सुरक्षा, पुनर्वास, उनके कारण होने वाली सुरक्षा चिंताएं भारत सरकार के लिए बड़ी चुनौती हैं। इन सबके बावजूद मानवीय दृष्टिकोण ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथ बांध रखे हैं।
भारत में 40 हजार से अधिक रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं। आतंकी घटनाओं में इन युवाओं का नाम आ रहा है। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भारत सरकार इन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को वापस भेजने के लिए दृढ़ है। वहीं यह समुदाय वापस जाने के लिए तैयार नहीं है।
रोहिंग्या मुसलमानों का कहना है कि वापस म्यामार लौटकर जाने पर इन्हें मार दिया जाएगा। इसके बाबत वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है। उच्चतम न्यायालय इस मामले में चार सितंबर 2017 को सुनवाई करेगा।