करगिल के एसएसपी डॉ. विनोद कुमार का कहना है कि अगस्त से लेकर अब तक उनके पास रोहिंग्या को लेकर केंद्र की तरफ से कोई भी इनपुट नहीं आया है। इस क्षेत्र के सभी थाने-चौकियों को अलर्ट किया गया है। यहां तक बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) और आर्मी को भी सचेत किया गया है कि वे किसी भी व्यक्ति को काम पर रखने से पहले जिला प्रशासन को उसकी सूचना दें। करगिल और उसके आसपास के दूसरे इलाकों में भी गहन छानबीन की गई है।
इसी तरह लेह की एसएसपी सर्गुन शुक्ला कहती हैं कि अभी रोहिंग्या को लेकर यहां कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है। पहले कुछ लोग इलाके में देखे गए थे, लेकिन पुलिस एवं सिविल प्रशासन ने उन्हें प्रोटेक्टिेड एरिया परमिट की बात कह कर यहां से रवाना कर दिया था।सभी चैकपोस्ट और निर्माण स्थलों पर भी गश्त रहती है। पुलिसकर्मी स्थानीय लोगों के सहयोग से रोहिंग्या के बारे में जानकारी लेती है।फिलहाल यहां रोहिंग्या नहीं हैं।
लद्दाख के काउंसलर भी कहते हैं कि उन्होंने किसी रोहिंग्या को नहीं देखा
दिक्सित के काउंसलर सेरिंग आंगचुक का कहना है कि रोहिंग्या इस इलाके में नहीं हैं।हम अखबारों में पढ़ते रहते हैं कि यहां पर रोहिंग्या हैं, लेकिन कोई भी बाहरी व्यक्ति हमारे साइन कराने या कोई दूसरा दस्तावेज सत्यापित कराने के लिए नहीं आया है। हुंदर के काउंसलर कूनजांग लोटोस भी मानते हैं कि रोहिंग्या हमारे क्षेत्र में नहीं हैं।हो सकता है कि वे लेह और उसके आसपास कहीं पर काम रहे हों।
कोरजोक इलाके के काउंसलर गुरमेत दोरजे का कहना है कि पहले कुछ लोग हमसे साइन कराने आए थे, लेकिन हमने मना कर दिया था।अब यदि ऐसा कोई केस सामने आता है तो हम उसे नंबरदार साहब के पास ले जाते हैं या पुलिस को सूचित कर देते हैं। अपर लेह के काउंसल गे लोबजेंग नयांतक कहते हैं कि शहर में पहले ऐसी बातें सुनने को मिल रही थी, लेकिन अभी रोहिंग्या को लेकर यहां कोई सूचना नहीं है। अगर कोई यह कहता है कि लद्दाख में सात हजार रोहिंग्या हैं तो वह गलत है।
खुफिया एजेंसियां मानती है कि लद्दाख में रोहिंग्या हैं और उनके चलते देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। कश्मीर में पहले भी ऐसे इनपुट मिलते रहे हैं कि पाक एजेंसियां रोहिंग्या मुसलमानों के साथ निकटता बढ़ा रही हैं।आतंकी छोटा बुर्नी जो कि एक मुठभेड़ में मारा गया था, वह रोहिंग्या बताया गया है। उसकी हाफिज सईद के साथ सीधी बातचीत रही है।
अका मुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्म्द जैसे आतंकी संगठन भी भारत में बस रहे रोहिंग्या पर कड़ी नजर रख रहे हैं। उनका प्रयास है कि इन्हें जैसे तैसे बहला-फुसला कर आतंकी गतिविधियों में धकेल दिया जाए।जांच एजेंसियों का कहना है कि रोहिंग्या पाकिस्तान की ओर झुक रहे हैं।कश्मीर के अलावा लद्दाख में भी पाक खुफिया एजेंसी सक्रिया हैं।
अभी हाल ही में तेलंगाना के बालापुर और कंचनबाग इलाके में रोहिंग्या के आधार कार्ड को लेकर 44 एफआईआर दर्ज हुई हैं। वहां पर रोहिंग्या मुसलमानों के पैन कार्ड और वोटर आईडी बनवाने के खेल का भी पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, लद्दाख में ऐसा ही खेल शुरू हो सकता है।
हालांकि करगिल में यह संभव है, मगर लेह में मुश्किल है। स्काई मरक्का के काउंसलर सोनम नोरबू का कहना है कि प्राइवेट वर्क एजेंसियां रोहिंग्या के कार्ड आदि बनवाने में सक्रिय हैं।सरकारी मशीनरी को इन पर निगाह रखनी होगी।