सुप्रीम कोर्ट में चेन्नई के एक समूह ‘इंडिक कलेक्टिव’ द्वारा याचिका दायर कर कहा गया है कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में रहने की इजाजत देना अशांति, हंगामा और दुर्दशा को आमंत्रित करने के समान है। समूह ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष लंबित रोहिंग्या मुसलमानों से संबंधित मामले में दखल देने की इजाजत मांगी है।
मालूम हो कि रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार वापस भेजने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ 11 सितंबर को सुनवाई करेगी। चार सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा था।
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इंडिक कलेक्टिव ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट को यह बताना चाहता है कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में रहने की इजाजत देने से क्या खतरा है। वकील सुवीदत्त एमएस की ओर से दायर याचिका में रोहिंग्या मुसलमानों को ‘इस्लामिक आतंक’ का चेहरा बताया गया है।
म्यांमार ने रोहिंग्या मुसलमान को नागरिकता देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद म्यांमार में हिंसा करने के बाद रोहिंग्या मुसलमान भारत भागकर आ गए है और जम्मू, हैदराबाद, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर आदि जगहों पर अवैध रूप से रह रहे हैं। भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान हैं।