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भंडारण: स्पूतनिक-वी वैक्सीन को माइनस 18 डिग्री सेल्सियस पर रखना होगा

Thu, 10 Jun 2021 06:30 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • रूस की वैक्सीन स्पूतनिक-वी के भंडारण को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है, इसके अनुसार इस वैक्सीन का भंडारण ग्रामीण क्षेत्रों में मुश्किल होगा
  • फ्रिजर के लिए डॉ. रेड्डी कंपनी ने रॉकवेल के साथ किया समझौता
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स्पूतिनक-वी वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जल्द ही कोविशील्ड व कोवाक्सिन की तरह स्पूतिनक-वी भी देश के ज्यादातर टीकाकरण केंद्रों पर उपलब्ध हो सकती है लेकिन उससे पहले जानकारी मिली है कि इस वैक्सीन के भंडारण के लिए कम से कम -18 डिग्री सेल्सियस तापमान युक्त फ्रिजर होना आवश्यक है। अभी तक कोविशील्ड और कोवाक्सिन को दो से आठ डिग्री तापमान पर रखा जा रहा है। देश के दुर्लभ या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में इतने कम तापमान में वैक्सीन रखने की व्यवस्था भी नहीं है।

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बुधवार को हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी फॉर्मा कंपनी ने बताया कि उनके पास पर्याप्त फ्रिजर नहीं होने के चलते रॉकवेल कंपनी के साथ करार किया है। समझौते के तहत रॉकवेल कंपनी स्पूतनिक वैक्सीन रखने के लिए 750 फ्रिजर मुहैया कराएगा। स्पूतनिक-वी को सीमित परीक्षण के तौर पर देश में 14 मई को लॉन्च किया गया था और उसका वाणिज्यिक लॉन्च जून में होने की उम्मीद है।


जानकारी यह भी है कि अगले सप्ताह से अपोलो के अस्पतालों में स्पूतनिक-वी उपलब्ध हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों तक यह वैक्सीन पहुंचना संभव नहीं है क्योंकि सरकारों ने कोविशील्ड और कोवाक्सिन के चलते स्टोरेज सुविधा पर काम नहीं किया। इससे पहले फाइजर कंपनी के साथ भी यही मुद्दा था जिसे पिछले साल दिसंबर में अनुमति नहीं मिली थी। 
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कोविड-19 के टीके तापमान के प्रति काफी संवेदनशील हैं और इसलिए इसकी ताकत को बनाए रखने के लिए उपयुक्त तापमान बरकरार रखने की आवश्यकता होती है। रॉकवेल ने कहा, 'टीके की सुरक्षा और उसकी ताकत को बनाए रखने में वैक्सीन फ्रीजर काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ रेड्डीज के जरिये भारत में उपलब्ध स्पूतनिक वी टीके के लिए तापमान को -18 डिग्री सेल्सियस बनाए रखने की आवश्यकता है ताकि इस टीके की स्थिरता और ताकत बरकरार रह सके।'

कंपनी ने कहा है कि रॉकवेल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रदर्शन, गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानक के अनुसार इस वैक्सीन फ्रीजर का विकास किया है। इसके लिए उसके तीन साल तक अनुसंधान एवं विकास प्रयासों के बाद अंतत: डेनमार्क में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अधिकृत एक प्रयोगशाला में अंतिम उत्पाद का परीक्षण किया गया। दो अलग-अलग आकार में इस फ्रीजर को प्रमाणित किया गया था।

रॉकवेल ने एक बयान में दावा किया, 'यह फ्रीजर ग्रामीण क्षेत्रों की कठिन परिस्थियों में भी काम कर सकता है और अपेक्षित तापमान दायरे को बरकरार रख सकता है। इस प्रकार यह टीके के लिए कोल्ड चेन संबंधी बाधाओं को दूर करता है।'

रॉकवेल इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक आलोक गुप्ता ने कहा, 'हमारी प्रौद्योगिकी यह सुनिश्चित करती है कि टीका केंद्रों पर स्पूतनिक-वी के भंडारण प्रबंधन इसके विनिर्माताओं द्वारा निर्धारित सख्त रेफ्रिजरेशन मानकों को पूरा करता है।'

रॉकवेल के निदेशक प्रतीक गुप्प्ता ने कहा कि कंपनी डॉ. रेड्डीज के साथ करीबी से काम कर रही है और वायरलेस इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित नियंत्रक एवं डाटा लॉगर प्रदान करती है ताकि वैक्सीन फ्रीजर के लिए तापमान संबंधी रियल टाइम डेटा हासिल की जा सके। उन्होंने कहा कि कंपनी रोजाना करीब 1,000 मशीन बना सकती है।

कंपनी ने कहा कि अपोलो, ओमेगा, एआईजी हॉस्पिटल्स आदि टीके के भंडारण के लिए इस वैक्सीन फ्रीजर का पहले से ही उपयोग कर रहे हैं। गुप्ता ने कहा, 'हम जापान के साथ शुरुआती सौदे के साथ-साथ विभिन्न विकसित देशों को अपना वैक्सीन फ्रीजर निर्यात करने की प्रक्रिया में हैं।' रॉकवेल के पास हैदराबाद में दो विनिर्माण इकाइयां हैं जिनकी कुल वार्षिक क्षमता एक लाख मशीनों के उत्पादन की है।

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