फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाजपा के लिए आसान हुआ राष्ट्रपति भवन का रास्ता

Sun, 12 Mar 2017 04:14 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
यूपी का संग्राम जीतने के साथ ही जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार की राह आसान हो गई है। पार्टी अब अपने राजग सहयोगियों के सहारे ही प्रणब मुखर्जी के उत्तराधिकारी के रूप में पसंद के व्यक्ति को राष्ट्रपति पद पर काबिज करा लेगी। 
विज्ञापन


भाजपा सूत्रों की मानें तो यूपी चुनाव परिणाम से पहले राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए जरूरी मतों में से सहयोगियों को लेकर उसके मतों की संख्या 42 प्रतिशत के करीब थी। अब यूपी और उत्तराखंड की जीत से उसका अपने मतों का आंकड़ा बढ़ जाएगा है। पार्टी को उम्मीद है कि कुछ छोटे दलों के समर्थन से ही राष्ट्रपति चुनाव में उसके उम्मीदवार का बेड़ा पार लग जाएगा। विपक्षी दलों पर कवायद की जरूरत नहीं पडे़गी।

इसके साथ ही भाजपा को राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ाने का मौका भी मिल गया है। उत्तरप्रदेश की 31 राज्यसभा सीटों में से भाजपा के 3 सांसद हैं। भविष्य में होने वाले राज्य सभा चुनावों में यूपी से भाजपा के सांसदों का राज्यसभा में एक ओर दबदबा बढ़ेगा। तो दूसरी ओर सपा, बसपा के साथ कांग्रेस का दखल भी कम होगा। वर्तमान में राज्यसभा में भाजपा की अपनी सीटें 56 हैं जबकि देश की राजनीति में लगातार धराशायी हो रही कांग्रेस पार्टी की संख्या 59 है। राज्यसभा केलिए यूपी का चुनाव अप्रैल 2018 में होना है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

'सरकार पीएम मोदी के सपने को पूरी तरह साकार कर सकेगी'

नरेंद्र मोदी - फोटो : file photo
उसी दौरान यह पता लग पाएगा कि भाजपा यूपी से कितनी सीट लाएगी। यही वजह है कि यूपी के चुनाव में भाजपा की ओर से मोदी सरकार को राज्यसभा में बहुमत दिलाने के नाम पर भी वोट मांगा। पार्टी का कहना है कि राज्यसभा में बहुमत मिलने से सरकार पीएम मोदी के सपने को पूरी तरह साकार कर सकेगी।

विपक्ष के असहयोगी रवैये से सरकार के आर्थिक सुधार के न सिर्फ कई कदम रुके हुए हैं बल्कि उसके कार्यों में लेटलतीफी भी हो रही है। वैसे यूपी की जीत का विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक असर भी गहरा पडे़गा।

यह है गणित
राष्ट्रपति चुनाव के लिए जरूरी मतों की संख्या के करीब 47 से 48 प्रतिशत तक भाजपा पहुंच गई है। शेष 2 प्रतिशत मत हासिल करने में उसे कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें