365 जगह के सैंपल लेकर की गई जांच
रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन से पहले 387 निगरानी स्थल से सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 77.26 मानक पर खरे उतरे थे। लॉकडाउन के दौरान उन्हीं जगह पर 365 सैंपल लिए गए, जिनमें से 75.89 फीसदी ही मानक मुताबिक पाए गए। सीपीसीबी का कहना है कि इससे लॉकडाउन के दौरान नदियों के पानी में सुधार नहीं होने पुष्टि होती है।
इन 19 नदियों पर आधारित है रिपोर्ट
गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा, व्यास, ब्रह्मपुत्र, बैतरणी, ब्राह्मणी, कावेरी, चंबल, घग्गर, महानदी, माही, पेन्नार, साबरमती, सतलुज, स्वर्णरेखा और तापी।
ऐसी रही छह नदियों की गंदगी (जल गुणवत्ता प्रतिशत में)
| नदी |
पहले |
अब |
| गंगा |
64.6 |
46.2 |
| व्यास |
100 |
95.45 |
| चंबल |
75 |
46.15 |
| सतलुज |
87.1 |
78.3 |
| स्वर्णरेखा |
80 |
53.33 |
| यमुना |
42.8 |
66.67 |
| साबरमती |
55.6 |
55.6 |
| माही |
92.9 |
92.9 |
| ब्राह्मणी |
85 |
100 |
| ब्रह्मपुत्र |
87.5 |
100 |
| कावेरी |
90.5 |
96.7 |
| गोदावरी |
65.8 |
78.4 |
| कृष्णा |
84.6 |
94.4 |
| तापी |
77.8 |
87.5 |