चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी गुट को पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों से जुड़े दावों पर जवाब देने के लिए 10 जुलाई शाम 5:30 बजे तक का समय दिया है। ममता बनर्जी गुट पहले ही अपना पक्ष रख चुका है और बागी गुट के दावों को खारिज कर चुका है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रहे अंदरूनी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को बड़ी राहत देते हुए अपना पक्ष रखने के लिए 10 जुलाई तक का समय दिया है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने बागी गुट से पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों से जुड़े अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज और जवाब शुक्रवार शाम 5:30 बजे तक जमा करने को कहा है।
इससे पहले 2 जुलाई को चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक टीएमसी गुट और ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट, दोनों को नोटिस भेजकर अपने-अपने दावे और जवाब 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक देने को कहा था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार को चुनाव आयोग के सामने अपना जवाब दाखिल कर दिया। हालांकि, बागी गुट ने अतिरिक्त समय मांगा, जिसके बाद आयोग ने उसे 10 जुलाई तक का समय दे दिया।
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ममता गुट ने क्या कहा?
चुनाव आयोग को दिए अपने जवाब में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने बागी गुट के सभी दावों को खारिज कर दिया। पार्टी ने कहा कि उसके संविधान के अनुसार संगठनात्मक समितियां वर्ष 2027 तक वैध हैं। टीएमसी ने यह भी बताया कि पार्टी के आखिरी संगठनात्मक चुनाव 2022 में हुए थे। ऐसे में बागी गुट का यह दावा कि 2025 में समितियों का कार्यकाल समाप्त हो गया, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है।
बागी गुट का क्या दावा है?
विवाद पिछले सप्ताह तब और बढ़ गया, जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के पूर्ण पीठ से मुलाकात की। इस गुट ने दावा किया कि वही असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है। बागी गुट का कहना है कि उसने 22 जून को पार्टी का विशेष संगठनात्मक अधिवेशन आयोजित किया था और उसमें किए गए संगठनात्मक बदलावों की जानकारी चुनाव आयोग को दे दी है। अब वह चाहता है कि आयोग इन बदलावों को मान्यता दे।
टीएमसी ने चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
चुनाव आयोग द्वारा बागी गुट को अतिरिक्त समय दिए जाने पर टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि आयोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम कर रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब इस मामले में सभी की नजर 10 जुलाई पर है, जब बागी गुट अपना विस्तृत जवाब और दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपेगा। इसके बाद आयोग दोनों पक्षों के दावों की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई करेगा।