कश्मीर घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी का मुद्दा अब तक अधर में हैं लेकिन इस बीच घाटी में बचेखुचे कश्मीरी पंडितों के भी पलायन का खतरा पैदा हो गया है। वर्तमान में अनंतनाग, त्राल समेत दक्षिण कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के परिवार रह रहे हैं।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के गृह क्षेत्र अनंतनाग के अलावा पूरे दक्षिण कश्मीर में पंडितों के परिवारों की सुरक्षा पर केंद्र सरकार गंभीर है। आतंकी बुरहान मुजफ्फर वानी की मौत के बाद फैली व्यापक हिंसा ने कश्मीर से बाहर रहने वाले कश्मीरी पंडितों को भी घाटी निवासी पंडितों के बारे में चिंतित किया है।
पीएमओ में राज्य मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से विस्तृत बातचीत की है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों को उन्होंने इस बाबत आश्वस्त किया है।
ऑल इंडिया कश्मीरी समाज के उपाध्यक्ष एमएल मल्ला ने सोमवार को डा. सिंह से मुलाकात की। कश्मीरी पंडितों का मानना है कि कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादियों द्वारा पंडितों की वापसी और सेटेलाइट टाउनशिप का विरोध पहले से किया जा रहा था।
सैनिक कालोनी के विरोध में भी अलगाववादियों ने कश्मीरी समाज को डराया। इसके अलावा औद्योगिक नीति के जरिये गैर कश्मीरियों को उद्योग लगाने की छूट के मुद्दे को भी गलत तरीके से प्रचारित किया गया।
इस कारण घाटी में असंतोष पैदा हुआ जो बुरहान वानी की मौत के विरोध के बहाने उजागर हो रहा है। पंडित समाज के नेता डा. तेज के. टिक्कू, संजय सप्रू, विनोद फोतेदार और राज नेहरू ने भी पीएमओ राज्य मंत्री से मुलाकात कर चिंता जाहिर की।