फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Risk Allowance: केंद्र सरकार के सभी विभागों में मिलेगा यह 'रिस्क अलाउंस', कर्मियों को पूरी करनी होगी यह शर्त

सार

Risk Allowance: डीओपीटी द्वारा दो सितंबर को जारी पत्र में कहा गया है कि अगर किसी विभाग में तय जोखिम नियमावली या उससे बाहर कोई जोखिम है, तो उस स्थिति में कर्मियों को रिस्क अलाउंस दिया जाएगा। रिस्क अलाउंस, वेतन का हिस्सा नहीं होगा...
विज्ञापन
Risk Allowance: Government Office - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार के सभी विभागों में कर्मचारियों को रिस्क अलाउंस यानी जोखिम भत्ता मिलेगा। हालांकि इसके लिए कर्मियों को एक शर्त पूरी करनी होगी। डीओपीटी द्वारा दो सितंबर को जारी पत्र में कहा गया है कि अगर किसी विभाग में तय जोखिम नियमावली या उससे बाहर कोई जोखिम है, तो उस स्थिति में कर्मियों को रिस्क अलाउंस दिया जाएगा। रिस्क अलाउंस, वेतन का हिस्सा नहीं होगा। अगर किसी विभाग में जोखिम की कोई नई श्रेणी दिखती है, तो उसके लिए डीओपीटी व वित्त विभाग से चर्चा की जाए। इस बारे में स्टाफ साइड की विभागीय परिषद 'जेसीएम' से भी सलाह की जाएगी। संबंधित मंत्रालय एवं विभाग की जिम्मेदारी है कि वह समय-समय पर अपने कर्मियों के स्वास्थ्य की जांच कराते रहें। यदि एक ही तरह के कार्य का जोखिम, किसी दूसरे मंत्रालय में भी है तो वहां उसी तर्ज पर रिस्क अलाउंस व अन्य सहायता प्रदान की जाएगी।

निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले सरकारी कर्मियों के जोखिम भत्ते की राशि में दो साल पहले, 90 रुपये प्रति महीना से लेकर 900 रुपये तक का इजाफा किया गया था। अस्सी के दशक में यह भत्ता 20 रुपये से लेकर अधिकतम 200 रुपये तक होता था। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत जोखिम भत्ते में वृद्धि की गई। नवंबर 2020 में अकुशल वर्कर को 90 रुपये, बतौर मासिक जोखिम भत्ता देने का निर्णय लिया गया। अर्धकुशल वर्कर को 135 रुपये, कुशल कर्मचारी को 180 रुपये, सुपरवाइजर को 225 रुपये, अराजपत्रित अधिकारी, जो डायनामाइट या नाइट्रो ग्लिसरीन तैयार करने जैसी ड्यूटी कर रहे हों, उन्हें 405 रुपये बतौर रिस्क अलाउंस मिलते हैं। राजपत्रित अधिकारी, जो डायनामाइट या नाइट्रो ग्लिसरीन तैयार करने जैसे जोखिम वाले काम में लगा है, उसे 675 रुपये मिलेंगे। इनके अलावा खतरनाक भवनों में काम करने वाले वाले अधिकारियों को 900 रुपये मासिक जोखिम भत्ता मिलता है।

डीओपीटी के 22 अगस्त 1988 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, अकुशल वर्कर को 20 रुपये मासिक जोखिम भत्ता मिलता था। अर्धकुशल वर्कर को 30 रुपये, कुशल कर्मचारी को 40 रुपये, सुपरवाइजर को 50 रुपये, अराजपत्रित अधिकारी जो डायनामाइट या नाइट्रो ग्लिसरीन तैयार करने जैसी ड्यूटी कर रहा हो, उसे 150 रुपये दिए जाते थे। तब राजपत्रित अधिकारी जो डायनामाइट या नाइट्रो ग्लिसरीन तैयार करने जैसे काम में लगा था, उसे 190 रुपये मिलते थे। इनके अलावा खतरनाक भवनों में काम करने वाले वाले अधिकारियों को 200 रुपये मासिक जोखिम भत्ता दिया जाता था। साल 2012 में भी जोखिम भत्ते को रिवाइज किया गया था। उस वक्त अकुशल वर्कर को 40 रुपये मासिक जोखिम भत्ता देने की घोषणा की गई। अर्धकुशल वर्कर को 60 रुपये, कुशल कर्मचारी को 80 रुपये, सुपरवाइजर को 100 रुपये, अराजपत्रित अधिकारी जो डायनामाइट या नाइट्रो ग्लिसरीन तैयार करने जैसी ड्यूटी कर रहा हो, उसे 180 रुपये दिए गए। राजपत्रित अधिकारी जो डायनामाइट या नाइट्रो ग्लिसरीन तैयार करने जैसे काम में लगा है, उसे 300 रुपये देना तय हुआ था।

खतरनाक भवनों में काम करने वाले वाले अधिकारियों को उस वक्त 400 रुपये मासिक जोखिम भत्ता दिया गया। जोखिम वाले अन्य कार्यों में वे सब बातें शामिल हैं, जहां लंबे समय तक काम करने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। अंडर ग्राउंड ड्रेन की सफाई या अस्पताल, जहां पर संक्रमण फैलने का खतरा है और जोखिम वाले भवनों को रिस्क ड्यूटी में शामिल किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें