ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मंगलवार को कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत और खाड़ी देशों जैसे देश अब अपनी राह खुद चुनने में सक्षम हैं। वे हर मुद्दे पर अमेरिका या चीन से सहमत हों, यह जरूरी नहीं है। नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में उन्होंने कहा कि दुनिया में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। इससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ रही है।
नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था में आ रहा बदलाव
‘द एंड ऑफ प्रिडिक्टेबिलिटी’ यानी ‘अनिश्चितता का दौर’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में सुनक ने कहा कि दुनिया उस बहुपक्षीय और नियमों पर आधारित व्यवस्था से दूर जा रही है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार दिया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बदलाव की वजह नहीं, बल्कि इसके लक्षण हैं। अब दुनिया किस नई व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, यह स्पष्ट नहीं है। इससे भू-राजनीतिक अनिश्चितता और खतरे काफी बढ़ गए हैं।
चीन बना अमेरिका का बड़ा प्रतिद्वंद्वी
सुनक ने कहा कि चीन अब आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में अमेरिका के बराबर का प्रतिस्पर्धी बनकर उभरा है। उनके मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव है। चीन की बढ़ती ताकत ने दुनिया के शक्ति संतुलन को बदल दिया है और इसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ेगा।
भारत और खाड़ी देश अपने हितों को देंगे प्राथमिकता
सुनक ने भारत और खाड़ी देशों की बढ़ती स्वतंत्र भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि ये देश अब अपने हितों के मुताबिक फैसले लेने में सक्षम हैं। वे हर बार अमेरिका या चीन के साथ खड़े नहीं होंगे, बल्कि वही करेंगे जो उनके लिए सही होगा। उन्होंने इसे वैश्विक व्यवस्था में उभरती एक नई विशेषता बताया।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे ज्यादा सशस्त्र संघर्ष
दुनिया में बढ़ते सुरक्षा संकट पर चिंता जताते हुए सुनक ने कहा कि इस समय दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी भी दौर के मुकाबले ज्यादा सशस्त्र संघर्ष हो रहे हैं। उन्होंने दुनिया भर में देशों से जुड़े 61 सशस्त्र संघर्षों का जिक्र किया और कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है। सुनक ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जहां वह इन संघर्षों को लेकर चिंतित हैं, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप शायद इन्हें नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के 61 अवसरों के रूप में देखते होंगे।
अब ताकत और सैन्य क्षमता की अहमियत बढ़ रही
सुनक ने अमेरिकी राष्ट्रपति के उप चीफ ऑफ स्टाफ की एक टिप्पणी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा था कि दुनिया अब ऐसी स्थिति में है, जहां ताकत, शक्ति और बल के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। सुनक ने इस सोच को कुछ हद तक अतिवादी बताया, लेकिन साथ ही कहा कि मौजूदा दौर में सैन्य और रणनीतिक ताकत का महत्व निश्चित रूप से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि देश अब समझ रहे हैं कि उनकी आर्थिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी क्षमता एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इन सभी क्षेत्रों में बढ़ते जोखिम मिलकर ऐसी वैश्विक स्थिति बना रहे हैं, जहां अनिश्चितता और चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते दौर पर चर्चा
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में आयोजित ‘द एंड ऑफ प्रिडिक्टेबिलिटी’ सत्र में ऐसे दौर में नेतृत्व की भूमिका पर चर्चा हुई, जब अनिश्चितता, बिखराव और तेजी से बदलती परिस्थितियां वैश्विक अर्थव्यवस्था की पहचान बन रही हैं। इस चर्चा में टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन और ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी जोनाथन ग्रे भी शामिल हुए। यह फोरम 13 से 15 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष इसकी थीम ‘ए वर्ल्ड इन प्ले: डिफाइनिंग द न्यू लेवर्स ऑफ पावर’ है।