अभिनेता ऋषि कपूर ने जेएलएफ में एक बार फिर खुद से जुड़े पुराने विवाद को हवा दे दी। उन्होंने गांधी परिवार का नाम लिए बगैर कहा कि अधिकांश सरकारी संपत्तियों पर एक ही परिवार में पैदा हुए व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। जबकि कई ऐसे स्थानीय लोग होते हैं, जिन्होंने शहर व देश के विकास में बहुत योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह बात सभी राजनीतिक दलों पर लागू होती है। जिसकी सरकार होती है, वह ऐसा ही करने लगता है।
जेएलएफ में शुक्रवार को अभिनेता ऋषि कपूर खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि मैं बीजेपी का चमचा हूं। बात केवल इतनी है कि मैं खुलकर, बिना डरे, अपनी प्रतिक्रिया देता हूं। इसलिए मुझे कोई काम गलत लगता है, तो मैं सरकार की और भाजपा की भी मुखालफत करता हूं। मेरा राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है और मैं न ही किसी पार्टी का समर्थन और न ही विरोध करता हूं।
उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों से राजनेताओं के नाम हटें, चाहे संविधान बदलना पड़े। ऋषि कपूर ने ‘मैं शायर तो नहीं’ सत्र में सरकारी संपत्तियों का नाम राजनेताओं के नाम पर नहीं रखने के मुद्दे पर पत्रकारों से भी सहयोग करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुद्दा देश से जुड़ा हुआ है और सभी इसके प्रति जागरूक होने चाहिए। अकेले दिल्ली में 64 संपत्तियां हैं जो एक परिवार के नाम से हैं। जेआरडी टाटा, लता मंगेशकर जैसे लोगों का योगदान भी अतुलनीय हैं।
एक्टिंग तो अब कर रहा हूं
rishi kapoor
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ऋषि कपूर ने कहा कि जिंदगी के इस पड़ाव पर सोचता हूं कि 25 साल तो मैने स्वेटर पहनकर नाच-गाने-रोमांस में निकाल दिए, एक्टिंग तो अब कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मैं इसलिए नहीं चला कि राजकपूर का बेटा हूं, मैने मेहनत की है। मेरे दादा पृथ्वीराज का मेरे पिता राजकपूर के करियर में, मेरे पिता का मेरे करियर में और मेरे बेटे रणबीर कपूर के करियर में कोई दखल नहीं है।
सभी मेहनत से चले, जबकि कई हीरो-हीरोइनों के बेटे अपना करियर फिल्मों में नहीं बना सके। स्टार का पुत्र होने मात्र से कोई फिल्म देखने नहीं चला जाता। जब मैं फिल्मों में आया, तो एक्शन की धूम थी और अमिताभ, धर्मेंद्र, शत्र्ुाघ्न सिन्हा जैसे हीरो राज कर रहे थे। मेरा फिल्मी करियर आसान नहीं था।