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दिल्ली जैसे दंगे का दुनिया में भारत की सेहत पर खराब असर पड़ता है : पूर्व विदेश सचिव

Fri, 28 Feb 2020 09:39 PM IST
Trainee Trainee डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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delhi violence
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दिल्ली में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की खबर दुनिया के अखबारों की सुर्खियां बनाई हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस के प्रवक्ता ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ऐसे हालात से निबटने के लिए महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने की सलाह भी दी है। 

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इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी, यूएससीआईआरएफ और वहां राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बर्नी सैंडर्स ने भी हालात को लेकर चिंता जताई है। पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा कि इस तरह के हालात चिंताजनक हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक संबंध समेत अन्य मामले में असर डालते हैं।
 
पाकिस्तान ने भी निभाई होगी भूमिका

पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि दिल्ली के हालात बिगाड़ने में पाकिस्तान की भूमिका रही होगी। उसके आउटर इलेमेंट ने राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा को देखकर अपनी भूमिका बढ़ाई होगी, क्योंकि जिस तरह से दिल्ली में हिंसा के बाद तैयारी सामने आ रही है, यह कोई एक दिन में की जाने वाली तैयारी नहीं है।
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वैसे भी पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने, सीएए आदि जैसे कानून का विरोध करके वह पस्त हो चुका है। इसलिए पड़ोसी देश की कोशिश इस तरह के माहौल के बहाने राष्ट्रपति ट्रंप और भारत के रिश्तों की केमिस्ट्री पर असर डालना रहा होगा। 

सांप्रदायिक टकराव के माहौल में विदेशी निवेशक नहीं आते

शशांक ने कहा कि इस तरह के टकराव के हालात में अंतरराष्ट्रीय निवेशक आने से कतराता है। विदेश मामलों के वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार, राजीव शर्मा का भी कहना है कि अस्थिरता के माहौल में कोई भला निवेश क्यों करना चाहेगा? शशांक का कहना है कि मौजूदा समय में निवेश को गहरा झटका लग रहा है।

घरेलू निवेशक निवेश करने से परहेज कर रहे हैं। इसके साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निवेशक भी रुचि नहीं ले रहा है। पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि शांति, स्थिरता और अर्थव्यवस्था में ग्रोथ निवेशकों को लुभाते हैं। शशांक कहते हैं कि मुझे लग रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का रुख काफी ढीला चल रहा है। 

पूछ रहे हैं सवाल और विदेश मंत्रालय दे रहा होगा सफाई

शशांक ने कहा कि हालांकि दिल्ली में सांप्रदायिक तनाव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई चेतावनी जैसी स्थिति नहीं है। जब भी इस तरह की स्थितियां होती हैं, विदेश मंत्रालय अपने कूटनीतिक चैनल के जरिए देशों को ब्रीफ करता है। उन्हें उठाए गए कदमों, विश्वास बहाली के उपायों तथा अन्य प्रयासों के बारे में जानकारी देता है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं या देशों को जवाब देकर उन्हें संतुष्ट कर देता है। शशांक ने कहा है ऐसा हो भी रहा है। 

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों में दिखाई देती है चिंता

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भले ही साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान दिल्ली में हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की आपत्तियों पर सीधा जवाब दे दिया हो और उन्हें भारत सरकार, सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गए कदमों की जानकारी दी हो, लेकिन दिल्ली में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का असर अधिकारियों के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ता है।

कुछ अधिकारियों का मानना है कि इस घटना ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा का पूरा आकर्षण खराब कर दिया। इस घटना पर भारत को भी सफाई देनी पड़ रही है। एक अन्य सूत्र के अनुसार विदेशी मीडिया की कवरेज भी काफी तंग करती है। इससे भारत को लेकर खराब संदेश जा रहा है।
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