केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत में हिंसा भड़काने और युवाओं को उकसाने की साजिश रची गई थी। रिजिजू ने बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं और फ्रांस में दंगों, आगजनी तथा लूटपाट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उनके बयान से एसआईआर और सत्ता परिवर्तन को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद फिर चर्चा में आ गया है।
रिजिजू ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कुछ नेताओं और भारत विरोधी समूहों ने मिलकर युवाओं को भड़काने तथा सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन संभव है, लेकिन यह चुनाव के जरिए ही हो सकता है। उन्होंने अपने बयान में जॉर्ज सोरोस का भी जिक्र किया। रिजिजू ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सत्ता परिवर्तन की बात करते दिखाई देते हैं।
रिजिजू ने बांग्लादेश और फ्रांस का उदाहरण क्यों दिया?
रिजिजू ने अपने बयान में बांग्लादेश में हुई हिंसक घटना और फ्रांस में दंगों, आगजनी तथा लूटपाट का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह की स्थिति भारत में पैदा करने की साजिश रची गई थी। उनके मुताबिक, कुछ समूहों और नेताओं ने युवाओं को उकसाकर सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। हालांकि, ये आरोप रिजिजू ने लगाए हैं। दिए गए विवरण में इन आरोपों के समर्थन में कोई अलग प्रमाण नहीं बताया गया है। मंत्री ने कहा कि भारत में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है, न कि हिंसा या किसी बाहरी व्यक्ति के जरिए सत्ता परिवर्तन।
एसआईआर को लेकर विवाद कैसे बढ़ा?
यह विवाद दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसी दौरान विपक्षी नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं की ओर से सत्ता परिवर्तन से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हुआ। रिजिजू ने इन टिप्पणियों को हिंसा भड़काने की कथित साजिश से जोड़ते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने सरकार की ओर से लगाए जा रहे सत्ता परिवर्तन के आरोपों को खारिज किया है।
प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की बात पर क्या कहा?
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सरकार के इस कथित आरोप को खारिज किया कि प्रदर्शन विपक्ष की ओर से सत्ता परिवर्तन कराने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य देश में चुनावी लोकतंत्र को बचाने की अपील करना है। भूषण के मुताबिक, यदि कथित मनमानी जारी रहती है, तो सत्ता परिवर्तन हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं और इसे लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देखते हैं। भूषण ने कहा कि सरकार के प्रति असंतोष जाहिर करना अपने आप में अपराध नहीं है। इस तरह सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर मंत्री और विरोध प्रदर्शन से जुड़े लोगों के बयान अलग-अलग हैं।
क्या सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ेगा?
रिजिजू के आरोप और भूषण के जवाब से एसआईआर के मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद और स्पष्ट हो गए हैं। एक तरफ केंद्रीय मंत्री ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने की कथित साजिश का आरोप लगाया है, वहीं भूषण ने आंदोलन को चुनावी लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा बताया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में रिजिजू के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं दिया गया है। विवाद का केंद्र मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए बयान हैं। दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी है।