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निजता का अधिकार : जानिए क्या था एमपी शर्मा बनाम सतीश चंद्र मामला

Fri, 25 Aug 2017 11:21 AM IST
amarujala.com-presented by: आनंद
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एमपी शर्मा मामला 15 मार्च 1954 को सामने आया था। ये मामला डालमिया समूह की कंपनियों के दस्तावेजों की तलाशी और जब्ती से संबंधित था। इसमें डालमिया जैन एयरवेज लिमिटेड के कारोबार की जांच हुई थी। इस कंपनी का पंजीकरण जुलाई 1946 में हुआ था और जून 1952 में यह बंद हो गई थी।
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एक जांच में कंपनी के भीतर भ्रष्टाचार का पता चला था। जांच में पाया गया कि गलत बैलेंस शीट के जरिए शेरयधारकों से वास्तविक जानकारी छुपाने के प्रयास किए गए। इस मामले में 19 नवंबर 1953 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी और दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट से दरख्वास्त की गई कि इस मामले में सर्च वारंट जारी किया जाए।

इस पर आरोपी ने दस्तावेजों की तलाशी और जब्ती को अदालत में चुनौती दी थी। मामले में मुख्य विचाराधीन मुद्दा ‘संपत्ति के संवैधानिक अधिकार’ और ‘खुद पर दोष लगाने से बचाव के अधिकार’ था। न्यायाधीशों को इस मामले में यह पता लगाना था कि निजता के अधिकार के उल्लंघन की स्थिति में क्या सरकार द्वारा तलाशी और जब्ती के अधिकार के लिए कोई संवैधानिक सीमाएं हैं।  
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आठ जजों का फैसला, तलाशी और जब्ती का अधिकार राज्य का

इसमें सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एमसी महाजन की अगुआई वाली आठ जजों की पीठ ने फैसला दिया था कि तलाशी और जब्ती का अधिकार राज्य का है। समाज की रक्षा के लिए कानून के तहत राज्य को ये अधिकार मिले हैं। संविधान बनाने वालों ने भी इस मामले को निजता के अधिकार के दायरे में भी सीमित नहीं किया है। 

खरग सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (18 दिसंबर 1962)

इस प्रकरण में खरग सिंह को डकैती मामले में आरोपी बनाया गया था। इस मामले में पर्याप्त सबूतों के अभाव में उसे रिहा कर दिया गया था। हालांकि उत्तर प्रदेश पुलिस ने तय नियम के तहत उसे निगरानी पर रखा था। खरग सिंह ने खुद को इस तरह से निगरानी पर रखे जाने से संबंधित कानून को चुनौती दी थी। दलील में कहा गया था कि यह जीवन व स्वतंत्रता और विचार की अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन है।

इस मामले में मुख्य सवाल यह था कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने नियमों के तहत निगरानी में कहीं नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन तो नहीं किया है, जैसा कि संविधान द्वारा नागरिकों को मूल अधिकारों की गारंटी दी गई है। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीपी सिन्हा की अगुआई वाली छह जजों की संवैधानिक पीठ ने खरग सिंह की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि संविधान के तहत ‘निजता के अधिकार’ की गारंटी नहीं मिली है।
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