एमपी शर्मा मामला 15 मार्च 1954 को सामने आया था। ये मामला डालमिया समूह की कंपनियों के दस्तावेजों की तलाशी और जब्ती से संबंधित था। इसमें डालमिया जैन एयरवेज लिमिटेड के कारोबार की जांच हुई थी। इस कंपनी का पंजीकरण जुलाई 1946 में हुआ था और जून 1952 में यह बंद हो गई थी।
एक जांच में कंपनी के भीतर भ्रष्टाचार का पता चला था। जांच में पाया गया कि गलत बैलेंस शीट के जरिए शेरयधारकों से वास्तविक जानकारी छुपाने के प्रयास किए गए। इस मामले में 19 नवंबर 1953 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी और दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट से दरख्वास्त की गई कि इस मामले में सर्च वारंट जारी किया जाए।
इस पर आरोपी ने दस्तावेजों की तलाशी और जब्ती को अदालत में चुनौती दी थी। मामले में मुख्य विचाराधीन मुद्दा ‘संपत्ति के संवैधानिक अधिकार’ और ‘खुद पर दोष लगाने से बचाव के अधिकार’ था। न्यायाधीशों को इस मामले में यह पता लगाना था कि निजता के अधिकार के उल्लंघन की स्थिति में क्या सरकार द्वारा तलाशी और जब्ती के अधिकार के लिए कोई संवैधानिक सीमाएं हैं।