अमर उजाला व अंजना वेलफेयर सोसाइटी की ओर से रिदम कला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 26 जनवरी से शुरू हुए इस कला महोत्सव का आयोजन 45 दिन तक चलेगा। सोसाइटी की फाउंडर व कथक नृत्यांगना माया कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इस महोत्सव का आयोजन पिछले आठ सालों से किया जा रहा है।
अभिनेता एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व: अखिलेंद्र मिश्रा
इसके तहत छोटे पर्दे के प्रसिद्ध अभिनेता और रंग मंच कर्मी अखिलेंद्र मिश्रा ने युवा रंग मंच कर्मियों को सुझाव दिया कि वह खुद को कैसे निखार सकते हैं। मिश्रा ने कहा कि अभिनेता एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व होता है। अभिनय एक आध्यात्मिक साधना है, रंग मंच एक आध्यात्मिक यात्रा है और सिनेमा एक आध्यात्मिक दृष्टि है।
मिश्रा ने एक 'अखिलामृतम' नामक एक किताब भी लिखी है। इसे लेकर उन्होंने कहा कि इस किताब से युवा कलाकारों को खुद की चेतना को जगाने का माध्यम मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो युवा कलाकार रंग मंच से सिनेमा के क्षेत्र में आना चाहते हैं वह संघर्ष के साथ खुद को तैयार करें। अध्यात्म से जुड़ें वरना भटकाव निश्चित है।
हम बुद्धि का अधिक उपयोग करते हैं चेतना का नहीं
उन्होंने कहा कि विश्व में हर व्यक्ति का जन्म ही अध्यात्म है, पूरा ब्रह्मांड ही अध्यात्म है। हम अपने आस-पास देखते ही नहीं हैं। हम बुद्धि का अधिक प्रयोग करते हैं लेकिन चेतना का उपयोग नहीं करते हैं। यदि हम अपनी चेतना का उपयोग करें तो हमें पता चलेगा कि सब कुछ अध्यात्म है। एक कलाकार जब कोई भूमिका निभा रहा होता है तो दो रूप जीता है।
लॉकडाउन के दौरान हुई लेखन की गंभीर शुरुआत
अपनी किताब को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा अध्ययन करने का स्वभाव बचपन से ही रहा। थिएटर में आने के बाद जब नाटक करना शुरू किया तो उसी में रम गए। बाद में जीवन जब कुछ स्थिर हुआ तो पढ़ना फिर से शुरू किया। जब लॉकडाउन लगा तो पढ़ने के साथ ही लिखना भी शुरू हो गया।
'चंद्रकांता', 'लगान' में निभा चुके हैं यादगार भूमिकाएं
अखिलेंद्र मिश्रा ने लोकप्रिय टीवी धारावाहिक चंद्रकांता में क्रूर सिंह की भूमिका निभाई थी। उन्होंने ऑस्कर के लिए नामित फिल्म लगान में भी काम किया है। रिदम कला महोत्सव के दौरान साहित्यिक परिचर्चा में मिश्रा ने अपने 40 साल के अनुभव को साधा किया। उन्होंने कहा कि अध्यात्म ही मानव की प्रकृति, कर्म और धर्म है।
इस महोत्सव को लेकर माया कुलश्रेष्ठ ने कहा कि भारतीय कला और संस्कृति हमारी पहचान है। इस संस्कृति और कला को ही पहचान दिलाना उद्देश्य है। इसी के लिए रिदम कला महोत्सव की शुरुआत की गई थी, जिसमें युवाओं को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक 150 से ज्यादा कलाकार इससे जोड़े जा चुके हैं।
निशुल्क है कार्यशाला
माया कुलश्रेष्ठ ने बताया कि महोत्सव के तहत होने वाली सभी कार्यशालाएं पूरी तरह निशुल्क हैं। इसमें नृत्य संगीत व नाट्य की कार्यशाला होगी। संस्था के अध्यक्ष मनीष कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इसमें देश-विदेश से कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित राजकुमार नायक, कथक गुरु अश्विनी, पंडित चरण गिरिधन, पद्मविभूषण पंडित तिलक गीताई भी इसमें हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि 45 दिन का ऑनलाइन कार्यक्रम है। वहीं तीन दिन का कार्यक्रम ऑफलाइन होगा। इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए अंजना वेलफयेर सोसाइटी के
फेसबुक पेज
पर जाकर इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं।