इंटरव्यू में जब पूछा गया कि वो सुशांत के अंतिम संस्कार में शामिल क्यों नहीं हुईं तो इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं वहां जाना चाहती थी लेकिन अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की सूची में मेरा नाम नहीं था। मुझे कुछ लोगों ने कहा कि सुशांत के परिवार वाले नहीं चाहते कि मैं वहां आऊं। अगर मैं वहां गई तो मुझे वहां से निकाल दिया जाएगा। हालांकि मेरी दो दोस्तों ने सुशांत के अंतिम दर्शन करने के लिए कहा था ताकि मैं उसकी मौत को स्वीकार सकूं।
मैं शवगृह गई थी और वहां पर सुशांत के अंतिम दर्शन किए और उसके पैर छुकर मैंने सॉरी बाबू कहा था। मैं आज भी सॉरी हूं क्योंकि सुशांत के काम को याद नहीं किया जा रहा बल्कि उसकी मौत का मजाक बना दिया गया है।