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आरजी कर केस: पूर्व प्रिंसिपल को जमानत मिलने पर पीड़िता के पिता का सवाल, सीबीआई की जवाबदेही कौन तय करेगा?

Sat, 17 Oct 2026 04:57 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर पीड़िता के पिता ने सीबीआई की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। डॉक्टरों ने भी जांच में देरी और कमियों का आरोप लगाया है। सीबीआई ने 147 गवाहों की सूची बनाई थी, जिनमें से सात के बयान दर्ज होने का दावा किया गया। क्या जांच एजेंसी इन सवालों का जवाब देगी?

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आरजी कर मामले में पीड़िता के पिता ने सीबीआई पर क्यों उठाए सवाल? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता के पिता ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई को अपने काम के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अगस्त 2024 में अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया था। अब संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में जमानत मिलने के बाद जांच एजेंसी की कार्रवाई पर फिर सवाल उठ रहे हैं।

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पीड़िता के पिता ने कहा कि अगर 147 करोड़ लोगों के भरोसे वाली जांच एजेंसी में इतनी कमियां हैं, तो लोग उस पर विश्वास कैसे बनाए रखेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए सरकार को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि सीबीआई एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को संदीप घोष को अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में जमानत दी थी। इस मामले में उनकी जमानत याचिकाएं पहले विशेष सीबीआई अदालत और कलकत्ता हाई कोर्ट से खारिज हो चुकी थीं।

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पीड़िता के पिता ने सीबीआई से क्या सवाल पूछा?
पीड़िता के पिता ने जांच एजेंसी की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर भरोसा पाने वाली संस्था के काम में कमियां सामने आती हैं, तो लोगों का विश्वास कैसे बना रहेगा। उन्होंने सरकार को सीधे दोष देने के बजाय सीबीआई की भूमिका पर सवाल उठाया। संदीप घोष को अगस्त 2024 में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद अस्पताल में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, उन्हें सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत वित्तीय अनियमितताओं के मामले में है, न कि दोनों मामलों में एक साथ।

डॉक्टरों ने जमानत मिलने पर नाराजगी क्यों जताई?
पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन से जुड़े डॉक्टरों ने भी जमानत के फैसले पर नाराजगी जताई। डॉक्टर उत्पल बंद्योपाध्याय ने सीबीआई से मामले में देरी को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जमानत के आदेश से न्याय की मांग कर रहे लोगों को गहरी निराशा, दुख और गुस्सा हुआ है। बंद्योपाध्याय ने मांग की कि मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में तेजी से पूरी की जाए। उन्होंने अपराध में कथित रूप से शामिल लोगों और राज्य के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार तथा डर का माहौल बनाने के आरोपों से जुड़े लोगों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की मांग की।

अनिकेत महतो ने जांच में किस तरह की कमी का आरोप लगाया?
आंदोलन से जुड़े एक अन्य प्रमुख डॉक्टर अनिकेत महतो ने इस घटनाक्रम को न्याय की लड़ाई लड़ रहे लोगों के लिए बेहद दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सीबीआई की जांच में गंभीर कमियां रही हैं। एबीपी आनंद को दिए बयान में महतो ने कहा कि एजेंसी ने 147 लोगों को गवाहों की सूची में शामिल किया था, लेकिन दो साल में केवल सात लोगों के बयान दर्ज किए गए। उन्होंने जांच एजेंसी की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लंबी चलती कार्यवाही से मामला कमजोर हुआ है। ये आरोप डॉक्टर महतो ने लगाए हैं।
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संदीप घोष को पहले किस मामले में जमानत मिली थी?
संदीप घोष ने विशेष सीबीआई अदालत से जमानत याचिका खारिज होने और कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले, दिसंबर 2024 में सियालदह अदालत ने उन्हें दुष्कर्म और हत्या के मामले में जमानत दे दी थी। उस समय सीबीआई अनिवार्य 90 दिनों की अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाई थी। हालांकि, दुष्कर्म और हत्या के मामले में जमानत मिलने के बावजूद संदीप घोष वित्तीय अनियमितताओं के मामले में हिरासत में थे। अब सुप्रीम कोर्ट से इस दूसरे मामले में भी जमानत मिलने के बाद पीड़िता के पिता और आंदोलन से जुड़े डॉक्टरों ने जांच एजेंसी की जवाबदेही और मुकदमे में देरी पर सवाल उठाए हैं।

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