दिल्ली के हरिनगर थाना इलाके में सड़क दुर्घटना में घायल हुए एक व्यक्ति ने सड़क पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। लोग उसके बगल से आते-जाते रहे लेकिन कोई भी उसे अस्पताल लेकर नहीं गया। अगर उसे समय से इलाज मिल जाता तो उस व्यक्ति की जान बच सकती थी।
इसके पीछे यह माना गया कि कोई भी व्यक्ति घायलों को यदि अस्पताल लेकर जाता है तो पुलिस उसके बहुत सारे प्रश्न पूछकर उसे ही परेशान कर देती है।
इसके बाद सरकार हरकत में आई। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने एक घोषणा की। सत्येंद्र जैन ने कहा कि जो भी रिक्शा या ऑटो वाला घायल लोगों को अस्पताल तक पहुंचाएगा उसे सरकार प्रोत्साहन राशि देगी।
हमनें इस विषय पर एक पोल कराया। लोगों से यह प्रश्न पूछा कि क्या स्वास्थ्य मंत्री की इस घोषणा के बाद घायलों को अस्पताल ले जाने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। ज्यादातर लोगों का यह मानना था कि सरकार के इस कदम से बदलाव तो होगा।
इस पोल में शामिल लगभग 53 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार की इस पहल से लोगों में घायल लोगों को अस्तपाल ले जाने की भावना विकसित होगी। इस फैसले से ऐसी कई जानें बच सकती है जिन्हें घायल होने के बाद सही इलाज नहीं मिला होता है।
इस पोल में शामिल 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि मिलने के बाद भी लोग सड़क पर पड़े घायलों को अस्पताल लेकर नहीं जाएंगे। वह लोगों को अस्पताल इसलिए नहीं लेकर जाएंगे क्योंकि पुलिस केस से डरते हैं।
करीब 3 प्रतिशत लोगों ऐसे भी रहे जिनकी इस मसले पर कोई राय नहीं है।