महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के आठ आदिवासी बहुल जिलों में ग्रुप सी और ग्रुप डी की सरकारी नौकरियों के लिए संशोधित आरक्षण व्यवस्था और प्वाइंट आधारित रोस्टर प्रणाली लागू कर दी है। यह जानकारी राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को दी। इसमें नाशिक, धुले, नंदुरबार, पालघर, यवतमाल, रायगढ़, चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिले शामिल हैं।
कैबिनेट उपसमिति की सिफारिश पर फैसला
इस निर्णय को चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उपसमिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अनुसार, नई आरक्षण व्यवस्था जिलों की जनसंख्या रचना और सामाजिक वर्गों के अनुपात के आधार पर तय की गई है।
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किन वर्गों को मिला आरक्षण?
नई व्यवस्था में कई सामाजिक वर्गों को आरक्षण दिया गया है। जिसमें अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), विमुक्त जाति (वीजे-ए), घुमंतू जनजातियां (एनटी-बी, एनटी-सी, एनटी-डी), विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), खुली श्रेणी (Open category) शामिल हैं।
SEBC कानून 2024 के तहत 10% आरक्षण
राज्य सरकार ने हाल ही में लागू एसईबीसी अधिनियम 2024 के तहत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10% आरक्षण दिया है।
जिले के अनुसार आरक्षण में अंतर
हर जिले में सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति अलग होने के कारण आरक्षण का प्रतिशत भी अलग-अलग तय किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय जनसंख्या के आधार पर सभी पिछड़े वर्गों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके।
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किस पर लागू होगा नया रोस्टर?
यह नया रोस्टर और आरक्षण पैटर्न अब से ग्रुप सी और ग्रुप डी की सभी सीधी भर्तियों पर लागू होगा। इसका फायदा स्थानीय आदिवासी और पिछड़े समुदायों को मिलेगा। मंत्री बावनकुले के अनुसार, 'नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आदिवासी और अन्य वंचित वर्गों को जनसंख्या के अनुपात में रोजगार में अवसर मिले।'