अयोध्या मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से आठ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में कहा गया कि नौ नवंबर के पांच सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले में कई गलतियां हैं और कई विरोधाभास हैं लिहाजा उस फैसले पर पुनर्विचार करने की दरकार है। पुनर्विचार याचिकाएं दायर करने की मियाद खत्म होने के आखिरी दिन यह पिटीशन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राजीव धवन के नेतृत्व में दाखिल की गई।
ये याचिकाएं मौलाना मुफ्ती हसबुल्लाह, मोहम्मद उमर, मौलाना महफूज उर रहमान, मिसबाउद्दीन, रिजवान, हाजी महबूब, असद और अयूब की ओर से दायर की गई हैं। पुनर्विचार याचिकाओं में कहा गया कि नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए क्योंकि यह कानून के विपरीत है। इसमें विरोधाभास है और पूर्ण न्याय का उल्लंघन है।
पुनर्विचार याचिका के मुख्य बिंदू
- याचिकाओं में कहा गया है कि हिन्दुओं को विवादित जमीन का मालिकाना हक दिया गया जबकि फैसले में कहा गया है कि मस्जिद को अवैध तरीके से तोड़ा गया और उसका लाभ हिन्दुओं को दे दिया गया।
- जबकि हिन्दुओं का कभी भी पूरे विवादित इलाके पर कब्जा नहीं था। 16 दिसंबर 1949 तक मुस्लिम वहां नमाज पढने जाते थे। बाद में हिन्दुओं ने उन्हें रोक दिया और जबरन घुस गए थे।
- साथ ही इन याचिकाओं में फैसले में यह स्वीकार किया जाना गलत है कि मूर्ति न्यायिक व्यक्ति हैं और बीच वाले गुंबद पर उनका अधिकार था जबकि यह भी माना गया है कि मूर्ति को जबरन बीच वालह गुंबद के नीचे रखा गया था।
- ऐसे में अवैध रूप से रखे गए मूर्ति का कानूनी दावा नहीं किया जा सकता। यहां मामला यह है कहि अवैध तरीके से मस्जिद ढहाया गया और जबरन कब्जा लिया गया और कानून का उल्लंघन किया गया।
- हिन्दू बाहरी अहाते में पूजा का अधिकार रखते थे और मुस्लिम 16 दिसंबर 1949 तक नमाज के लिए वहां जाते थे।
- याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मस्जिद को अवैध तरीके से तोड़ा गया और ऐसे में पूर्ण न्याय नहीं हुआ ऐसे में फैसले का फिर से विचार किया जाना चाहिए।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने मीडिया को बताया कि सात लोगों की ओर से पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समर्थन दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुनर्विचार याचिकाओं पर ओपन कोर्ट में सुनवाई हुई तो उनकी ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन पैरवी करेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले गत दो दिसंबर को मूल पक्षकार मोहम्मद सिद्दिकी के कानूनी वारिश व जमायत उलेमा ए हिन्द के यूपी अध्यक्ष मौलाना सैयद अहस रसीदी ने भी पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
बता दें कि नवंबर के सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन रामलला को को सौंप दी थी। जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही किसी अन्य जगह मस्जिद बनाने केलिए पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया गया था।