जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच को लेकर बांबे लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मालूम हो कि 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने जज लोया की मौत की जांच कराने से इनकार कर दिया था।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मंगलवार को पुनर्विचार याचिका पर विचार के बाद पाया कि 19 अप्रैल के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं है, लिहाजा पीठ ने एसोसिएशन की याचिका खारिज कर दी।
बांबे लॉयर्स एसोसिएशन ने पुनर्विचार याचिका दायर पर 19 अप्रैल के फैसले पर पुनर्विचार करने और उसे वापस लेने की गुहार की थी। एसोसिएशन ने पुनर्विचार याचिका में कहा गया था कि जिला जजों के बयानों पर भरोसा कर सुप्रीम कोर्ट का इस नतीजे पर पहुंचना कि हार्ट अटैक से जज लोया की मौत हुई थी, गलत है।
19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जज बीएस लोया की स्वाभाविक मौत हुई थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि चार न्यायिक अधिकारियों के बयान पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं बनता।
शीर्ष अदालत ने जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि इनमें कोई मेरिट नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि वास्तव में इन याचिकाओं के जरिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की गई और न्यायपालिका पर हमले का प्रयास किया गया।
मालूम हो कि हाईप्रोफाइल सोहराबुद्दीन शेख मामले की सुनवाई कर विशेष जज लोया की वर्ष 2014 में नागपुर के गेस्ट हाउस में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। जज लोया अपने अन्य साथी जजों के साथ एक शादी समारोह में शामिल होने नागपुर गए थे।